कृषि विज्ञान: लू से कपास फसल बचाने की सलाह
हनुमानगढ़ में लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी और तेज लू के बीच कृषि विभाग ने किसानों को कपास की फसल को सुरक्षित रखने के लिए विशेष सलाह जारी की है। जिले में इस बार कपास की बुवाई तेज गति से हुई है और अब तक लगभग एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बिजाई पूरी की जा चुकी है। हालांकि, बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं के कारण कई क्षेत्रों में अंकुरित पौधों के मुरझाने और कमजोर पड़ने की शिकायतें सामने आने लगी हैं। कृषि विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न गांवों का दौरा कर नई फसल पर हीटवेव के असर का निरीक्षण किया है।
संयुक्त निदेशक कृषि (विस्तार) डॉ. प्रमोद कुमार ने किसानों से मौसम के अनुसार खेती कार्य करने और वैज्ञानिक तरीके अपनाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि तेज गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए खेतों में हल्की सिंचाई बेहद जरूरी है। जिन किसानों के पास फव्वारा संयंत्र उपलब्ध हैं, वे तीन दिन के अंतराल पर फव्वारा विधि से सिंचाई करें, ताकि खेत में नमी बनी रहे और पौधों को गर्मी से राहत मिल सके।
कृषि विभाग ने फिलहाल किसी भी प्रकार के उर्वरक के उपयोग से बचने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार, खेत में गहरी जुताई कर नहर के पानी से पलेवा करने के बाद ही बुवाई करनी चाहिए। पिछेती बुवाई करने वाले किसान खेत के चारों ओर चारे की फसल की दो लाइनें लगाकर गर्म हवाओं का प्रभाव कम कर सकते हैं।
इसके अलावा, दोपहर बाद ट्रैक्टर चालित स्प्रेयर से पानी का हल्का छिड़काव करने तथा शाम के समय जुताई और बुवाई करने की सलाह भी दी गई है। विभाग ने बीटी कपास की खेती के लिए नाली या बेड विधि अपनाने को अधिक लाभकारी बताया है।
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