भारतीय कपास बाजार: मिलों की खरीदारी से कीमतों को सहारा, धागे की कमजोर मांग से तेजी सीमित
भारतीय कपास बाजार में गुजरात और उत्तर भारत के प्रमुख बाजारों में कीमतों में मजबूती आई है। हालिया गिरावट के बाद स्पिनिंग मिलों ने दोबारा खरीदारी शुरू कर दी है और अपने स्टॉक को बढ़ा रही हैं। हालांकि, सूती धागे की कमजोर मांग और नई फसल की आवक बढ़ने की संभावना के कारण कीमतों में बड़ी तेजी की गुंजाइश सीमित बनी हुई है। (SIS)
गुजरात और उत्तर भारत में कपास की कीमतें मजबूत
अहमदाबाद सहित गुजरात की विभिन्न मंडियों में हाजिर कपास की कीमतों में सुधार हुआ है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी मिलों की खरीदारी बढ़ने से भाव मजबूत हुए हैं। मिलें आगामी अधिक खपत वाले सीजन से पहले अपनी जरूरतों के अनुसार कच्चे कपास का स्टॉक तैयार कर रही हैं।
हालिया खरीदारी से बाजार में मजबूरी में बिक्री का दबाव कम हुआ है। हालांकि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सूती धागे की मांग कमजोर बनी हुई है। नवंबर के लिए धागे की कीमतें अक्टूबर के अंत के स्तर के आसपास बनी हुई हैं। इससे मिलों के लिए कच्चे कपास की बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो रहा है। (SIS)
मांग और आपूर्ति की स्थिति
मिलों की खरीदारी कपास की कीमतों को अल्पकालिक समर्थन देने वाला प्रमुख कारक रही है। हाल के हफ्तों में कम भाव का फायदा उठाकर स्पिनिंग मिलों और कपड़ा निर्माताओं ने स्टॉक बढ़ाया है। इससे हाजिर बाजार में उपलब्धता कुछ कम हुई और जिनिंग तथा व्यापारिक स्तर पर कीमतों में सुधार आया।
खराब मौसम और प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में कम उपज के कारण 2026-27 में भारत का कपास उत्पादन घटने की आशंका है। कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) और अन्य व्यापारिक संगठनों के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, उत्पादन 170 किलोग्राम की 28-29 मिलियन गांठों के आसपास रह सकता है। कुछ अनुमानों में पिछले सीजन की तुलना में 10% से अधिक गिरावट का संकेत दिया गया है। (SIS)
बाजार का आउटलुक
केंद्र सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर सीमा शुल्क छूट को दिसंबर 2026 के अंत तक बढ़ा दिया है। इससे घरेलू कीमतें बढ़ने पर मिलों को आयात का विकल्प मिलेगा। वहीं, कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की खरीद और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) व्यवस्था बाजार को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है।
नई फसल की आवक और मौसम बाजार की दिशा तय करेंगे। कटाई और जिनिंग तेज होने से मंडियों में आवक बढ़ सकती है, जिससे मौजूदा तेजी सीमित हो सकती है। कुल मिलाकर, निकट भविष्य में कपास की कीमतों में बड़ी तेजी के बजाय मामूली बढ़त के साथ स्थिरता रहने की संभावना है। (SIS)
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