टेक्सटाइल एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए MMF पर फोकस जरूरी: नीति आयोग
नीति आयोग और CRISIL Intelligence की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत को FY30 तक US$100 बिलियन का टेक्सटाइल एक्सपोर्ट लक्ष्य हासिल करने के लिए मैन-मेड फाइबर (MMF) आधारित उत्पादों पर अधिक ध्यान देना होगा। इसके साथ बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग, वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच और टेक्नोलॉजी व इनोवेशन में निवेश बढ़ाने की जरूरत है।
टेक्सटाइल सेक्टर भारत के प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में शामिल है। यह देश की GDP में करीब 2%, मैन्युफैक्चरिंग ग्रॉस वैल्यू एडेड (GVA) में 11% और मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में लगभग 9% योगदान देता है। यह 4.5 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है। FY25 में भारत ने करीब US$37.7 बिलियन के टेक्सटाइल उत्पादों का एक्सपोर्ट किया और वैश्विक टेक्सटाइल एवं अपैरल एक्सपोर्ट में 4.1% हिस्सेदारी के साथ छठे स्थान पर रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक टेक्सटाइल बाजार 2027 तक US$1.78-1.83 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। फास्ट फैशन, ई-कॉमर्स, शहरीकरण और बढ़ती डिस्पोजेबल इनकम से बाजार को समर्थन मिलने की उम्मीद है। टिकाऊ, सिलवट-रोधी, जल्दी सूखने वाले और परफॉर्मेंस आधारित उत्पादों की बढ़ती मांग से MMF की खपत भी बढ़ सकती है।
नीति आयोग के अनुसार, भारत की कॉटन-केंद्रित रणनीति एक चुनौती बन रही है, क्योंकि वैश्विक मांग तेजी से सिंथेटिक फाइबर की ओर बढ़ रही है। FY20 में कॉटन यार्न उत्पादन 3,962 मिलियन किलोग्राम था, जो FY23 में घटकर 3,438 मिलियन किलोग्राम रह गया। इसके विपरीत, मैन-मेड फिलामेंट यार्न और ब्लेंडेड/नॉन-कॉटन यार्न का उत्पादन बढ़कर 3,650 मिलियन किलोग्राम हो गया।
MMF सेक्टर के सामने कच्चे माल की लागत और आयात निर्भरता बड़ी चुनौती है। भारत घरेलू उत्पादन से PTA की करीब 75% और MEG की लगभग 65% मांग पूरी करता है। रिपोर्ट में PTA और MEG पर GST कम करने तथा MEG पर 5% कस्टम ड्यूटी घटाने या हटाने का सुझाव दिया गया है।
अगले 2-3 वर्षों में PTA क्षमता में हर साल लगभग 55 लाख टन की बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिससे घरेलू फीडस्टॉक उपलब्धता बढ़ सकती है और MMF सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सकता है।
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