वहीं, लगातार नुकसान के कारण किसानों का रुझान मक्का की खेती की ओर भी बढ़ रहा है। पिछले वर्ष 9,822 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का बोया गया था, जो इस वर्ष बढ़कर 11,220 हेक्टेयर हो गया है। अब किसानों की नजर मानसून पर टिकी है, क्योंकि समय पर और पर्याप्त बारिश ही उनकी इस जोखिम भरी खेती की सफलता तय करेगी।
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