6 साल बाद शिपकी ला के जरिए भारत-चीन सीमा व्यापार फिर शुरू, 16 व्यापारियों का पहला दल रवाना
भारत और चीन के बीच हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकी ला दर्रे के माध्यम से सीमा-पार व्यापार छह वर्षों के अंतराल के बाद फिर शुरू हो गया है। भारत को तिब्बत से जोड़ने वाला यह ऐतिहासिक सिल्क रूट लंबे समय से सीमावर्ती व्यापार का महत्वपूर्ण मार्ग रहा है। व्यापार की बहाली से सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और स्थानीय व्यापारियों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने सोमवार को 16 भारतीय व्यापारियों के पहले दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने बताया कि भारत और चीन के बीच व्यापार फिलहाल बार्टर सिस्टम (वस्तु-विनिमय प्रणाली) के तहत होगा, जिसमें मुद्रा के बजाय वस्तुओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। निर्धारित व्यवस्था के अनुसार व्यापारियों को 72 घंटे के भीतर भारत वापस लौटना होगा।
इस अवसर पर मंत्री ने शिपकी ला क्षेत्र में सीमा-पार व्यापार को सुगम बनाने के लिए स्थापित आधुनिक 'छुप्पन ट्रेड मार्ट' का भी उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह सुविधा व्यापारियों को आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराएगी और सीमा व्यापार को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद करेगी।
मंत्री ने व्यापारियों से केंद्र सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा निर्धारित आयात-निर्यात नियमों का पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सीमा व्यापार की सफलता के लिए नियमों का अनुपालन और सुरक्षा मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत भारत की ओर से 72 वस्तुओं तथा चीन की ओर से 30 वस्तुओं का वस्तु-विनिमय किया जा सकेगा। हालांकि, व्यापारियों ने व्यापार योग्य वस्तुओं की सूची का विस्तार करने की मांग भी उठाई है। इस पर जगत सिंह नेगी ने कहा कि राज्य सरकार इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष रखेगी। इसके बाद प्रस्ताव को विदेश मंत्रालय के माध्यम से चीन सरकार तक भेजा जाएगा।
करीब छह वर्ष बाद शिपकी ला के जरिए सीमा व्यापार की बहाली को भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे किन्नौर सहित आसपास के क्षेत्रों के व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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