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देरी से आए मानसून के कारण महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटा

2026-09-12 11:50:59
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मानसून में देरी से महाराष्ट्र में कपास का रकबा 10% घटा


महाराष्ट्र: मानसून में देरी और शुरुआती बारिश की कमी का असर महाराष्ट्र में कपास की बुवाई पर पड़ा है। देश के सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य में इस खरीफ सीजन कपास का रकबा करीब 10% घटकर 38.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। पिछले पांच वर्षों में राज्य में कपास की औसत बुवाई 42.5 लाख हेक्टेयर रही है। इस लिहाज से करीब 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कमी आई है।


भारत के कुल कपास क्षेत्र में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी करीब 38% है। कपास राज्य की प्रमुख खरीफ फसलों में शामिल है और कुल 1.4 करोड़ हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में इसका हिस्सा करीब 30% है। ऐसे में बुवाई क्षेत्र में कमी से उत्पादन और पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है।


मानसून में देरी का सबसे अधिक असर नासिक मंडल में पड़ा है। जलगांव, धुले, नंदुरबार और नासिक जिलों वाले इस मंडल में कपास की बुवाई 9.30 लाख हेक्टेयर के औसत क्षेत्र के मुकाबले घटकर 7.48 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी करीब 1.82 लाख हेक्टेयर की कमी आई है, जो 24% से अधिक है। जलगांव में भी कपास का रकबा 5.5 लाख हेक्टेयर के औसत से घटकर 4.3 लाख हेक्टेयर रह गया है।


छत्रपति संभाजीनगर मंडल में भी कपास की बुवाई में करीब 22% की गिरावट दर्ज की गई है। छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों वाले इस मंडल में औसत 10.3 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 8 लाख हेक्टेयर में कपास बोई गई है।


इसके विपरीत, अमरावती मंडल में कपास की बुवाई सामान्य रही। बुलढाणा, अकोला, वाशिम, अमरावती और यवतमाल जिलों में औसत 10.9 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के बराबर ही इस वर्ष कपास बोई गई है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में बुवाई के दौरान बारिश का वितरण बेहतर रहा।


हालांकि, अब कई कपास उत्पादक क्षेत्रों में पिछले दो सप्ताह से बारिश नहीं होने के कारण किसान फसल की बढ़वार को लेकर चिंतित हैं। धुले के किसान लक्ष्मण पाटिल ने कहा कि कपास की फसल को अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश की जरूरत है। बारिश नहीं होने पर फसल प्रभावित होने के साथ पैदावार में भी गिरावट आ सकती है।


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