कम बारिश से तेलंगाना के नलगोंडा में कपास-धान किसानों की बढ़ी चिंता
नलगोंडा, तेलंगाना: जिले में लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने और तापमान बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश की कमी और पानी की उपलब्धता पर बढ़ते दबाव का असर कपास और धान जैसी खरीफ फसलों पर पड़ रहा है।
मौसम की परिस्थितियों और El Niño के संभावित प्रभाव को देखते हुए किसानों को पानी की उपलब्धता के अनुसार फसल का चयन करने की सलाह दी गई थी। अधिकारियों ने धान और कपास जैसी अधिक पानी की जरूरत वाली फसलों के बजाय अरहर, उड़द और मूंग जैसी कम पानी वाली फसलों की खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया था।
पानी की कमी को देखते हुए किसानों से धान का रकबा सीमित करने की अपील भी की गई है। 8 अगस्त 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में करीब 33,000 एकड़ क्षेत्र में किसानों ने धान के बजाय वैकल्पिक फसलों की खेती शुरू कर दी थी। इस क्षेत्र को बढ़ाकर 1.5 लाख एकड़ करने का लक्ष्य रखा गया था।
बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में कपास किसानों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। लंबे समय तक बारिश नहीं होने से मिट्टी में नमी की कमी हो सकती है, जिससे कपास की बढ़वार और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। जिन किसानों के पास सिंचाई की पर्याप्त सुविधा नहीं है, उनके लिए स्थिति और कठिन हो सकती है।
धान की खेती के लिए भी पर्याप्त पानी जरूरी है। जलाशयों और अन्य सिंचाई स्रोतों में पानी की उपलब्धता कम रहने पर किसानों को फसल बचाने के लिए अतिरिक्त सिंचाई पर निर्भर रहना पड़ सकता है। इससे खेती की लागत बढ़ सकती है।
मौजूदा परिस्थितियों में नलगोंडा के किसानों के लिए आने वाली बारिश बेहद महत्वपूर्ण है। यदि बारिश में सुधार नहीं होता है, तो कपास और धान समेत खरीफ फसलों की उत्पादकता पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
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