Filter

Recent News

एमपी के 1.25 लाख किसानों को 249 करोड़ की सौगात

एमपी के सवा लाख से ज्यादा किसानों को बड़ी सौगात, सरकार ने खातों में डाले 249 करोड़ रुपएBhavantar- मध्यप्रदेश के किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी सौगात दी है। उनके खातों में 249 करोड़ रुपए डाले गए हैं। भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को यह राशि दी गई है। प्रदेश के सवा लाख से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिलेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों को एक क्लिक से भावांतर की राशि ट्रांसफर की। उन्होंने इंदौर के देपालपुर विधानसभा के गौतमपुरा में आयोजित कार्यक्रम में किसानों के खातों में सोयाबीन भावांतर योजना के पैसे डाले। इससे पहले गौतमपुरा में सीएम मोहन यादव ने रोड शो किया जिसमें बड़ी संख्या में लोग आए। आमजन ने फूलों से सीएम का स्वागत किया।प्रदेश के सोयाबीन किसानों को हर हाल में एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए भावांतर योजना 2025 योजना लागू की गई है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार ने सोयाबीन के एमएसपी की गारंटी दी है। मंडियों में सोयाबीन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मिलने की स्थिति में शेष राशि का भुगतान राज्य सरकार कर रही है।गौतमपुरा में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत सीएम मोहन यादव ने 249 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की। प्रदेश के कुल 1 लाख 34 हजार किसानों के बैंक खातों में यह राशि डाली गई है। किसानों के खातों में राशि अंतरण के साथ ही सीएम ने यहां विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भूमिपूजन किया।26 नवंबर को 4265 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेटइधर भावांतर योजना में 26 नवंबर को 4265 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपना सोयाबीन मंडी में बेचा है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है।बता दें कि सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए, 22 नवंबर को 4285 रुपए, 23 व 24 नवंबर को 4282 रुपए और 25 नवंबर को 4277 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ था। योजना में राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।और पढ़ें :- मध्य प्रदेश: MSP विरोध में किसानों ने कपास खेतों में छोड़े मवेशी

मध्य प्रदेश: MSP विरोध में किसानों ने कपास खेतों में छोड़े मवेशी

मध्य प्रदेश : किसानों ने कपास की फसल में मवेशी छोड़ा, MSP के लिए खंडवा जाने से किया इनकार.बुरहानपुर: लोनी गांव के किसान सुनील महाजन ने अपने खेत में लगी कपास की फसल में मवेशी घुसा दिए. उन्होंने 2 एकड़ में लगी खड़ी कपास मवेशियों को खिला दी. बुरहानपुर में केला उत्पादक किसानों के बाद अब कपास उत्पादक किसान भी अपनी कपास को बाजार या मंडी में बेचने के बजाए अपनी खड़ी फसलें मवेशियों को खिलाने के लिए मजबूर हो गए हैं.एमएसपी के लिए खंडवा ले जानी पड़ रही कपासकिसान सुनील महाजन ने 2 एकड़ में कपास की फसल लगाई थी. लेकिन समर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी बुरहानपुर में नहीं होकर खंडवा में किए जाने से नाराज किसान ने अपनी कपास की फसल को मवेशियों को खिला कर नष्ट कर दी है. किसान इसे मजबूरी और विरोध दोनों बता रहा है. कपास की फसल को मवेशियों को खिलाने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.बुरहानपुर में एमएसपी पर कपास खरीदी की मांगसमर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी सीसीआई द्वारा खंडवा में की जा रही है, लेकिन किसान को अपनी फसल बुरहानपुर से खंडवा ले जाना काफी भारी पड़ रहा है. उन पर परिवहन का भार बढ़ गया है. जिसके चलते किसान ने मवेशियों को कपास में छोड़ दिया. अब पीड़ित किसान ने सरकार से यह मांग की है कि कपास की समर्थन मूल्य पर बुरहानपुर में ही खरीदी व्यवस्था की जाए.8200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है कपास का एमएसपीबुरहानपुर में 16 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में कपास लगाई गई है. इस साल सरकार ने कपास का समर्थन मूल्य 8200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन बुरहानपुर के किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है. समर्थन मूल्य पर कपास बेचने में परिवहन शुल्क देने की शर्त ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी है. बुरहानपुर के किसानों को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई के खंडवा खरीदी केंद्र तक कपास पहुंचाने के लिए परिवहन शुल्क देना होगा. इससे स्थानीय किसानों ने इनकार कर दिया है.विरोध स्वरूप मवेशियों को खेत में छोड़ाकिसानों ने सीसीआई की शर्त नहीं मानी और विरोध स्वरूप फसल नष्ट करने के लिए मवेशियों को खेत में चरने के लिए छोड़ दिया है. कपास किसान सुनील महाजन का कहना है कि "सरकार को कपास उत्पादक किसानों की सुध लेनी चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक संकट से जूझना न पड़े. यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो कपास उत्पादक किसानों को कपास की फसल से मोह भंग हो जाएगा. मजबूरन किसानों को दूसरी खेती की तरफ रुख अपनाना पड़ेगा, इससे कपास उत्पादन में कमी आएगी, भविष्य में कपास से निर्मित वस्तुओं के निर्माण में कठिनाई हो सकती है.और पढ़ें :- रुपया 07 पैसे बढ़कर 89.20 पर खुला

अब CCI खरीदेगी उत्पादन के अनुसार कपास

14 क्विंटल की बाध्यता खत्म, अब CCI खरीदेगी कपास किसानों के उत्पादन के अनुसारकपास उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है। भारतीय कपास निगम (CCI) ने जिले में कपास खरीदी नीति में बदलाव किया है। अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 14.01 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा के अनुसार ही कपास खरीदी जा रही थी। इससे अधिक उत्पादन वाले किसानों को शेष कपास खुले बाजार में कम दाम में बेचनी पड़ती थी।भास्कर ने 26 अक्टूबर को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद शासन स्तर से CCI को किसानों के वास्तविक उत्पादन के अनुसार कपास खरीदी करने के आदेश दिए गए।कृषि विभाग के डी.डी.ए. एस.एस. राजपूत ने बताया कि उत्पादन का प्रमाण पत्र संबंधित क्षेत्र के कृषि अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा। मंगलवार को खरगोन केंद्र में दिनेश पटेल, बड़वाह केंद्र में रेखा शाह और कविता शाह को प्रमाण पत्र जारी किए गए। अब यह सुविधा किसानों के हित में लागू हो गई है और वे अपने उत्पादन के अनुसार सही मूल्य पर कपास बेच सकेंगे।स्लॉट बुकिंग में बदलावकपास खरीदी के लिए स्लॉट सोमवार से शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से बुक किए जाएंगे। पहले शादियों के सीजन और किसानों के बोवनी के चलते स्लॉट मिनटों में भर जाते थे, जिससे कई किसानों को परेशानी होती थी। अब हर किसान जिस दिन स्लॉट बुक करेगा, अगली सप्ताह उसी दिन उसे उपलब्ध होगा।मंडी समिति ने किसानों से अपील की है कि यदि किसी कारण से वे बुक किए गए दिन कपास नहीं ला पाए, तो स्लॉट कैंसल कर दें, ताकि अन्य किसानों को अवसर मिल सके।और पढ़ें :- “2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

“2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जारी किए 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमानमुख्य फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि; कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 173.33 मिलियन टन रहने का अनुमानकृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए, जिनमें देशभर में कुल फसल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है।अनुमानों के अनुसार, कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 3.87 मिलियन टन बढ़कर 173.33 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है। यह वृद्धि अनुकूल मानसून और बेहतर फसल प्रबंधन के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।🔹 कपास उत्पादन — मजबूत प्रदर्शन जारीवर्ष 2025–26 में कपास उत्पादन 29.22 मिलियन गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो क्षेत्रीय मौसमीय विविधताओं के बावजूद स्थिर और सशक्त प्रदर्शन को दर्शाता है। यह निरंतर उत्पादन देश के टेक्सटाइल और निर्यात क्षेत्रों को सशक्त करने में सहायक होगा।🔹 तेलबीज और सोयाबीन उत्पादन — मजबूत वृद्धि की संभावनावर्ष 2025–26 के लिए कुल खरीफ तेलबीज उत्पादन 27.56 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र के ठोस प्रदर्शन को दर्शाता है।मूंगफली (ग्राउंडनट): 11.09 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 0.68 मिलियन टन अधिक है।सोयाबीन: 14.27 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिससे यह देश की प्रमुख खरीफ तेलबीज फसल के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।ये अनुमान तेलबीज क्षेत्र में मजबूत सुधार और विस्तार को दर्शाते हैं, जो भारत के खाद्य तेल आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करते हैं।🔹 समग्र फसल प्रदर्शनश्री चौहान ने कहा कि यद्यपि कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक वर्षा से चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अधिकांश इलाकों में संतुलित मानसूनी वितरण से प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल वृद्धि को बल मिला है।खरीफ धान — 124.50 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 1.73 मिलियन टन अधिक है।खरीफ मक्का— 28.30 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले सत्र से 3.50 मिलियन टन अधिक है।मोटे अनाज — 41.41 मिलियन टन रहने का अनुमान।दलहन — 7.41 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिसमेंतुर (अरहर) — 3.60 मिलियन टन,उड़द — 1.20 मिलियन टन,मूंग — 1.72 मिलियन टन शामिल हैं।ये अनुमान पिछले वर्षों की उत्पादकता प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय अवलोकनों, फील्ड रिपोर्टों तथा राज्य सरकारों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। अंतिम संशोधन फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद किए जाएंगे।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे गिरकर 89.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

जेपी मॉर्गन: FY27 तक तेल कीमतें $30 तक गिर सकती हैं

जेपी मॉर्गन ने FY27 तक तेल की कीमतों में भारी गिरावट और $30s तक गिरने की चेतावनी दी: रिपोर्टअगर ऐसा होता है, तो ऐसा करेक्शन भारत के लिए काफी राहत देगा, जहाँ तेल इंपोर्ट मैक्रो स्टेबिलिटी पर बहुत ज़्यादा असर डालता हैजेपी मॉर्गन ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर एक शानदार अनुमान जारी किया है, द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इन्वेस्टमेंट बैंक को लगता है कि ब्रेंट क्रूड FY27 के आखिर तक $30 की रेंज में आ सकता है।यह अनुमान इस उम्मीद पर आधारित है कि सप्लाई में ज़्यादा बढ़ोतरी होगी जो अगले तीन सालों तक डिमांड ग्रोथ से ज़्यादा रहेगी।अगर ऐसा होता है, तो ऐसा करेक्शन भारत के लिए काफी राहत देगा, जहाँ तेल इंपोर्ट मैक्रो स्टेबिलिटी पर बहुत ज़्यादा असर डालता है।द इकोनॉमिक टाइम्स का कहना है कि 2025 में ग्लोबल तेल की डिमांड 0.9 mbd बढ़ने वाली है, जिससे कुल खपत 105.5 mbd हो जाएगी। 2026 में डिमांड ग्रोथ स्थिर रहने और 2027 में 1.2 mbd तक बढ़ने की संभावना है। हालांकि, जेपी मॉर्गन के अनुमान बताते हैं कि 2025 और 2026 दोनों में सप्लाई डिमांड से लगभग तीन गुना तेज़ी से बढ़ेगी। भले ही 2027 में सप्लाई ग्रोथ कम हो जाए, फिर भी उम्मीद है कि यह उससे ज़्यादा होगी जिसे मार्केट आराम से झेल सकता है।इस अंतर के पीछे एक मुख्य वजह नॉन-OPEC+ आउटपुट की नई मज़बूती है। जैसा कि द इकोनॉमिक टाइम्स ने बताया है, जेपी मॉर्गन का मानना है कि 2027 तक आधी बढ़ी हुई सप्लाई प्रोड्यूसर अलायंस के बाहर से आएगी, जिसे मज़बूत ऑफशोर प्रोजेक्ट्स और ग्लोबल शेल में लगातार तेज़ी का सपोर्ट मिलेगा। ऑफशोर, जिसे कभी महंगा और साइक्लिकल बिज़नेस माना जाता था, अब एक भरोसेमंद, कम लागत वाली ग्रोथ स्ट्रीम बन गया है। अनुमान है कि यह 2025 में 0.5 mbd, 2026 में 0.9 mbd और 2027 में 0.4 mbd का योगदान देगा। 2029 तक लगभग सभी FPSOs पहले से ही मौजूद हैं, इसलिए बैंक को आने वाले ऑफशोर एडिशन पर बहुत ज़्यादा विज़िबिलिटी दिख रही है।शेल ऑयल सिस्टम का सबसे ज़्यादा रिस्पॉन्सिव सप्लाई लीवर बना हुआ है। हालांकि US शेल ग्रोथ धीमी हो गई है, लेकिन प्रोडक्टिविटी में बढ़ोतरी और बेहतर कैपिटल एफिशिएंसी से आउटपुट बढ़ रहा है। US के अलावा, अर्जेंटीना का वाका मुएर्ता एक्सपोर्ट कैपेसिटी बढ़ाने के सहारे एक कॉस्ट-कॉम्पिटिटिव, स्केलेबल बेसिन बन गया है। द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में ग्लोबल शेल आउटपुट 0.8 mbd बढ़ा है, और अगर क्रूड ऑयल $50 के बीच में रहता है, तो शेल सप्लाई 2026 में 0.4 mbd और 2027 में 0.5 mbd बढ़ सकती है।इन बढ़ोतरी से इन्वेंट्री में काफी बढ़ोतरी हुई है। द इकोनॉमिक टाइम्स ने जेपी मॉर्गन के इस अंदाज़े का ज़िक्र किया है कि इस साल अब तक ग्लोबल स्टॉक में 1.5 mbd की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें से लगभग 1 mbd ऑयल-ऑन-वॉटर और चीनी इन्वेंट्री में है। बैंक को उम्मीद है कि यह जमा हुआ सरप्लस 2026 तक फैल जाएगा, जिससे बिना किसी सुधार के 2026 में 2.8 mbd और 2027 में 2.7 mbd तक ज़्यादा स्टॉक हो सकता है।द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह के उतार-चढ़ाव का मतलब है कि ब्रेंट अगले साल $60 से नीचे जा सकता है, 2026 के आखिर तक $50 के निचले स्तर पर आ सकता है, और उस साल के आखिर में कीमतें $4 के लेवल पर आ सकती हैं। 2027 के लिए, जेपी मॉर्गन का अनुमान है कि यह एवरेज लगभग $42 रहेगा, और फिस्कल ईयर के आखिर तक कीमतें $30 तक गिरने की संभावना है। हालांकि बैंक मानता है कि पूरी गिरावट शायद न हो, लेकिन उसे उम्मीद है कि मार्केट बैलेंस मुख्य रूप से अपनी मर्ज़ी से और ज़बरदस्ती प्रोडक्शन में कटौती करके होगा। 2026 में ब्रेंट के लिए जेपी मॉर्गन का वर्किंग अनुमान $58 है, जबकि अभी ब्रेंट की कीमतें $60 प्रति बैरल से थोड़ी ऊपर हैं।और पढ़ें :- हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा

हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा

CCI को हाई कोर्ट का नोटिस: विदर्भ में कॉटन प्रोक्योरमेंट सेंटर की कमी; हाई कोर्ट ने कॉटन कॉर्पोरेशन से कहाCCI को हाई कोर्ट का नोटिस: देश में सबसे ज़्यादा कॉटन प्रोडक्शन वाले विदर्भ में प्रोक्योरमेंट सेंटर की बहुत कमी है। हाई कोर्ट ने कॉटन कॉर्पोरेशन को सिर्फ़ 89 सेंटर खोलने पर फटकार लगाई है, जबकि सैकड़ों किसान प्रोक्योरमेंट सेंटर का इंतज़ार कर रहे हैं, और किसानों के हित में तुरंत फ़ैसले लेने का इशारा दिया है। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)CCI को हाई कोर्ट का नोटिस: विदर्भ में कॉटन किसानों के साथ एक बार फिर नाइंसाफ़ी हुई है। 16,86,485 हेक्टेयर कॉटन की खेती वाले विदर्भ में कम से कम 557 प्रोक्योरमेंट सेंटर की ज़रूरत होने के बावजूद, कॉटन कॉर्पोरेशन ने सिर्फ़ 89 सेंटर चालू किए हैं। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने मंगलवार को कॉटन कॉर्पोरेशन को इस गंभीर लापरवाही के लिए कड़ी फटकार लगाई और तीन हफ़्ते के अंदर डिटेल में जवाब देने का आदेश दिया। (CCI को हाई कोर्ट का नोटिस)पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन और कोर्ट में सुनवाईमहाराष्ट्र के कंज्यूमर पंचायत के डिस्ट्रिक्ट सेक्रेटरी श्रीराम सतपुते की फाइल की गई पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन पर जस्टिस अनिल किलोर और रजनीश व्यास की बेंच के सामने सुनवाई हुई।इस मौके पर, कोर्ट फ्रेंड एडवोकेट पुरुषोत्तम पाटिल के जमा किए गए एफिडेविट में कॉटन कॉर्पोरेशन की बेपरवाह पॉलिसी की तीखी आलोचना की गई और किसानों की असली हालत बताई गई।557 सेंटर की ज़रूरत – सिर्फ 89 सेंटर शुरू हुए: कोर्ट का सवालपिटीशन में दिए गए डेटा के मुताबिक,नागपुर डिविजन: 10.39 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती लेकिन 213 सेंटर की ज़रूरतअमरावती डिविजन: 10.39 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती लेकिन 344 सेंटर की ज़रूरतलेकिन असल में शुरू हुए सेंटर सिर्फ 35 और 54 सेंटर हैं!इस बड़ी गड़बड़ी पर गुस्सा दिखाते हुए बेंच ने सवाल उठाया कि कॉर्पोरेशन ने किस बेसिस पर किसानों को बताया कि सेंटर काफी हैं? किसानों को दोहरा झटका; प्राइवेट व्यापारियों को फ़ायदाकॉर्पोरेशन ने पिछले कुछ सालों की तरह इस साल भी नवंबर के दूसरे हफ़्ते से ख़रीद शुरू कर दी।इस वजह से, लाखों किसानों के पास प्राइवेट व्यापारियों को कपास बेचने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।मिनिमम सपोर्ट प्राइस से 8000-1000 रुपये कम रेटबड़ा फ़ाइनेंशियल नुकसानएडवोकेट पाटिल ने साफ़ कहा कि यह स्थिति कॉर्पोरेशन की देरी वाली पॉलिसी का सीधा नतीजा है।ख़रीद की लिमिट और नमी के परसेंटेज पर कोर्ट में बहसअभी, 'कॉटन किसान' ऐप के ज़रिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी हैऔर ख़रीद की लिमिट 5 क्विंटल प्रति एकड़ है।हालांकि, विदर्भ में एवरेज प्रोडक्शन 6 से 10 क्विंटल/एकड़ है।इसलिए, कोर्ट में लिमिट बढ़ाकर 10 क्विंटल करने की मांग की गई।साथ ही, यह भी सुझाव दिया गया है कि नमी की लिमिट भी 12% से बढ़ाकर 15% कर दी जाए।1 - कॉर्पोरेशन को हर साल 31 सितंबर को या उससे पहले कपास की खरीद शुरू करनी चाहिए।2 - रजिस्ट्रेशन और स्लॉट बुकिंग को ज़रूरी नहीं बनाया जाना चाहिए। किसानों को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों सुविधाएं दी जानी चाहिए।3 - कॉर्पोरेशन को उन किसानों को मुआवज़ा देना चाहिए जिन्हें मिनिमम सपोर्ट प्राइस से कम कीमत पर कपास बेचना पड़ता है।4 - कॉटन खरीद सेंटर हर साल अप्रैल के आखिर तक चालू रखे जाने चाहिए।और पढ़ें :- रुपया 03 पैसे गिरकर 89.25 पर खुला

कपास कीमत संकट: एमएसपी से 800 रुपये नीचे, किसान नुकसान में

Cotton Price Crisis: एमएसपी से भी 800 रुपये नीचे आया कपास का दाम, इंडस्ट्री को फायदा...नुकसान में किसान।देश में कपास के दाम लगातार गिर रहे हैं और किसानों को MSP से 700–800 रुपये कम कीमत मिल रही है. जीरो इंपोर्ट ड्यूटी से जहां कपड़ा उद्योग को बड़ा फायदा हो रहा है, वहीं बढ़ते आयात और कमजोर मांग की वजह से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा, जिससे वे कपास छोड़कर दूसरी फसलों की ओर जा रहे हैं.सोयाबीन और मक्के के बाद अब कपास का नंबर है. देश में कपास की कीमतें लगातार गिर रही हैं. सरकारी डेटा बताता है कि किसानों को एमएसपी से 700-800 रुपये तक कम रेट मिल रहे हैं. मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) की बात करें तो केंद्र सरकार ने मध्यम रेशे वाले कपास के लिए 7710 रुपये प्रति क्विंटल और लंबे रेशे वाले कपास के लिए 8110 रुपये रेट तय किया है. मंडियों में अभी अधिक आवक मध्यम रेशे वाले कपास की है, जिसका रेट 6988 रुपये चल रहा है, जबकि एमएसपी 7710 रुपये है. रेट की यह जानकारी सरकारी एजेंसी एगमार्कनेट ने दी है. कीमतों में यह गिरावट ऐसे समय में देखी जा रही है जब केंद्र सरकार ने कपास की इंपोर्ट ड्यूटी जीरो कर रखी है. रेट की गिरावट से साफ है कि सरकार के इस फैसले का फायदा व्यापारियों और मिल मालिकों को मिल रहा है जबकि किसान एमएसपी के लिए भी जूझ रहे हैं. मतलब साफ है क‍ि इंपोर्ट ड्यूटी जीरो करने के बाद क‍िसानों पर बड़ी आर्थ‍िक चोट पड़ी है. अगर यही हाल रहा तो क‍िसान कपास की खेती को और कम कर देंगे. आवक कम, दाम भी कम सरकार का एक आंकड़ा बताता है कि जिस तेजी से कपास की एमएसपी में वृद्धि हुई है, उसके ठीक उलट किसानों को मिलने वाले मॉडल प्राइस में गिरावट आई है. चौंकाने वाली बात ये है कि मंडियों में कपास की आवक समय के साथ गिरी है. ट्रेड का एक सामान्य नियम है कि जब आवक गिरती है, सप्लाई घटती है तो प्रोडक्ट का दाम बढ़ता है. लेकिन कपास के मामले में ऐसा नहीं हुआ. इसके दाम बढ़ने के बजाय गिर गए और इसकी सबसे बड़ी वजह है जीरो इंपोर्ट ड्यूटी.म‍िल माल‍िकों को फायदा, क‍िसानों को नुकसान भारत में कपास पर जीरो इंपोर्ट ड्यूटी है. इसका मतलब हुआ कि देश का कोई भी व्यापारी या मिलर जीरो आयात शुल्क के साथ कपास का आयात कर सकता है. सरकार ने इसे 31 दिसंबर तक के लिए जारी रखा है. सरकार का तर्क है कि जीरो इंपोर्ट ड्यूटी होने से देश के कपड़ा उद्योग की लागत स्थिर होगी जिससे कपड़ा कंपनियों को मदद मिलेगी और किसानों के कपास की खरीद बढ़ेगी.सरकार का यह तर्क नियम के अनुरूप है, मगर धरातल पर इसका कोई फायदा नहीं दिख रहा है. धरातल पर हालात यह हैं क‍ि क‍िसानों को नुकसान हो रहा है. अगर फायदा होता तो किसानों को कपास की अच्छी कीमतें मिलतीं. हालत तो ये है कि किसान कपास की एमएसपी भी नहीं ले पा रहे हैं. दूसरी ओर कपड़ा कंपनियां और मिल मालिक फायदा उठा रहे हैं.तहस-नहस को जाएगी खेती इस ट्रेंड के बारे में कपास के एक्सपर्ट विजय जावंघिया कहते हैं, इंपोर्ट ड्यूटी जीरो होने से कपड़े का दाम 2से 2.5 रुपये तक कम होगा जिसका सीधा फायदा मिलों और व्यापारियों को मिलेगा. एक अनुमान के मुताबिक, इपोर्ट ड्यूटी के इस फैसले से कपड़ा इंडस्ट्री को 15,000 करोड़ रुपये का फायदा होगा जबकि किसानों की पूरी खेती तहस-नहस हो जाएगी. इसका प्रभाव भी दिखने लगा है क्योंकि किसान अब कपास के ध्यान हटाकर दलहन और तिलहन पर टिका रहे हैं. इसका सीधा-सीधा कारण कपास की गिरती कीमतें और जीरो इंपोर्ट ड्यूटी है.आयात से नुकसान खेती और ट्रेड का एक सीधा फंडा है कि जब कोई माल बाहर से आना शुरू होता है तो लोकल स्तर पर उसका प्रोडक्शन घटने लगता है. यह नियम सरकार को भी पता है, उसके बावजूद दिसंबर तक कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी जीरो करना सोच से परे है क्योंकि कपास का सीजन अक्तूबर से शुरू होता है और कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) खरीद शुरू करता है. कपास का आयात देखें तो इसमें लगातार वृद्धि जारी है. क‍ितना बढ़ा आयात सरकार का आंकड़ा बताता है कि 2023-24 में जहां 1550312 बेल्स (एक बेल में 170 किलो) का आयात हुआ, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 4139941 बेल्स हो गया. जिस दौरान कपास का आयात बढ़ता गया, उस दौरान देश में कपास की खेती स‍िकुड़ती गई. इसके बावजूद किसानों को अच्छे दाम नहीं मिले. वजह है, विदेश से कपास की खरीद. जब मिलों और व्यापारियों को विदेशी माल आसानी से और कम रेट पर मिल जाएगा तो वे देश के किसानों से कपास क्यों खरीदेंगे? इससे किसानों में हताशा है और वे कपास की जगह किसी और फसल की ओर रुख कर रहे हैं. क‍ितनी है कीमत रेट की इस हालत के पीछे ग्लोबल ट्रेंड को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है. यानी पूरी दुनिया में कपास की खरीद सुस्त है, इसलिए भारत के कपास की मांग गिर गई है. एक्सपर्ट बताते हैं कि कमजोर डिमांड के बीच ग्लोबल प्राइस ट्रेंड की वजह से कीमतें MSP से नीचे बनी हुई हैं, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि सीसीआई यानी कॉटन कारपोरेशन ऑफ इंड‍िया MSP पर खरीद करके किसानों को राहत देगा. लेकिन यह राहत तब काम आएगी जब किसानों को एमएसपी वाला दाम मिलेगा.सीसीआई की खरीद से ही पता चलता है कि प्राइवेट ट्रेड में कच्चे कॉटन (कपास) की कीमतें 6,500 रुपये और 7,500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रही हैं, जो 8,100 रुपये के MSP से कम है.जाहिर सी बात है कि जब सरकारी एजेंसी भी किसानों को एमएसपी रेट नहीं दे रही है तो किसान व्यापारियों से क्या उम्मीद कर सकते हैं. कुल मिलाकर, किसानों के लिए एमएसपी दूर की कौड़ी बन गई है जिसके बारे में वे सुनते जरूर हैं, मगर वह रेट उनके हाथ नहीं आता. अब किसानों की पूरी उम्मीद सरकार पर टिकी है कि वह बाजार में किसी तरह से दखल दे और कपास की एमएसपी दिलवाए.और पढ़ें :- महाराष्ट्र: कॉटन खरीद में किसानों का CCI की ओर बढ़ता रुझान

Related News

Youtube Videos

📉 रुई बाजार में गिरावट! रुई 300₹ टूटी 🔥 CCI Auction | Cotton Sowing Report #kapas
📉 रुई बाजार में गिरावट! रुई 300₹ टूटी 🔥 CCI Auction | Cott...
आज का कपास बाजार भाव 🚨 तेजी या मंदी? रुई, कॉटन सीड, खल और यार्न का पूरा अपडेट | #cotton #today
आज का कपास बाजार भाव 🚨 तेजी या मंदी? रुई, कॉटन सीड, खल और य...
आज देशभर में रुई के ताज़ा भाव 😱 | Cotton Market Review | आज का कपास बाजार #cotton #kapas #yarn
आज देशभर में रुई के ताज़ा भाव 😱 | Cotton Market Review | आज...
🔥Cotton Market Today: गुजरात में ₹300 की तेजी | CCI ने बेची 54,300 गांठें #cotton
🔥Cotton Market Today: गुजरात में ₹300 की तेजी | CCI ने बेची...
🔥 Cotton Rate Today: MP में ₹500 की तेजी | CCI ने बेची 80,700 गांठें | Cotton Market Update
🔥 Cotton Rate Today: MP में ₹500 की तेजी | CCI ने बेची 80,7...
कपास बाजार में मिलाजुला रुख!😱 इस सप्ताह तेजी या मंदी? cotton market rate #youtube
कपास बाजार में मिलाजुला रुख!😱 इस सप्ताह तेजी या मंदी? cotto...
जानिए आज का कपास बाज़ार 😱 Cotton rate today #youtube
जानिए आज का कपास बाज़ार 😱 Cotton rate today #youtube
🔥 Cotton Rate Today: रुई ₹300 तक तेज 😱CCI ने बेची 21,500 गांठें | महाराष्ट्र में कपास बुवाई घटी!
🔥 Cotton Rate Today: रुई ₹300 तक तेज 😱CCI ने बेची 21,500 ग...
रुई बाजार में ₹500/Candy की तेजी 😱 CCI Auction में 48,100 गांठें बिकी🔥Cotton market rate #cotton
रुई बाजार में ₹500/Candy की तेजी 😱 CCI Auction में 48,100 ग...
🚨 आज कॉटन बाजार का पूरा विश्लेषण | CCI Auction, आवक और सभी मंडियों का ताज़ा अपडेट | #kapasnabhav
🚨 आज कॉटन बाजार का पूरा विश्लेषण | CCI Auction, आवक और सभी...
🚨 कपास बाजार में बड़ा अपडेट! CCI Auction, NCDEX में तेजी 🔥 Cotton Market Report Today
🚨 कपास बाजार में बड़ा अपडेट! CCI Auction, NCDEX में तेजी 🔥...
कॉटन फिजिकल मार्केट में जबरदस्त तेजी! 🔥500 ₹ तक बढ़े दाम | CCI नीलामी का बड़ा असर ? #cotton #market
कॉटन फिजिकल मार्केट में जबरदस्त तेजी! 🔥500 ₹ तक बढ़े दाम |...
आज के कपास बाज़ार की रिपोर्ट 😨 Cotton Market Rate Today #kapas #youtube
आज के कपास बाज़ार की रिपोर्ट 😨 Cotton Market Rate Today #kap...
जानिए आज का कपास बाज़ार  😱 Cotton market rate today #kapas #cotton
जानिए आज का कपास बाज़ार 😱 Cotton market rate today #kapas #...
Cotton market rate today😱 आज का कपास बाज़ार  #kapas #cotton
Cotton market rate today😱 आज का कपास बाज़ार #kapas #cotton

Circular

title Created At Action
रुपया 10 पैसे गिरकर 89.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ 27-11-2025 22:45:01 view
एमपी के 1.25 लाख किसानों को 249 करोड़ की सौगात 27-11-2025 19:21:31 view
मध्य प्रदेश: MSP विरोध में किसानों ने कपास खेतों में छोड़े मवेशी 27-11-2025 18:23:56 view
रुपया 07 पैसे बढ़कर 89.20 पर खुला 27-11-2025 17:28:03 view
अब CCI खरीदेगी उत्पादन के अनुसार कपास 27-11-2025 01:44:50 view
“2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी” 27-11-2025 01:19:53 view
रुपया 02 पैसे गिरकर 89.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ 26-11-2025 22:48:22 view
जेपी मॉर्गन: FY27 तक तेल कीमतें $30 तक गिर सकती हैं 26-11-2025 19:47:51 view
हाई कोर्ट ने सीसीआई से विदर्भ में कपास केंद्रों की कमी पर जवाब मांगा 26-11-2025 18:34:05 view
रुपया 03 पैसे गिरकर 89.25 पर खुला 26-11-2025 17:26:14 view
कपास कीमत संकट: एमएसपी से 800 रुपये नीचे, किसान नुकसान में 26-11-2025 00:18:24 view
Application Download
Whatsapp Contact