31 जुलाई तक कपास बुवाई 103.54 लाख हेक्टेयर, तिलहन क्षेत्र बढ़ा
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी 31 जुलाई 2026 तक के खरीफ बुवाई आंकड़ों के अनुसार, देश में कपास की बुवाई 103.54 लाख हेक्टेयर में हुई है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 106.06 लाख हेक्टेयर की तुलना में 2.52 लाख हेक्टेयर कम है। वहीं, सामान्य बुवाई क्षेत्र 125.51 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अब तक लगभग 82.5% क्षेत्र में कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है।
वहीं, तिलहन (Oilseeds) की कुल बुवाई 172.32 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 171.13 लाख हेक्टेयर की तुलना में 1.19 लाख हेक्टेयर अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि इस सीजन में तिलहन फसलों का रकबा पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रहा है।
तिलहन फसलों में सोयाबीन का सर्वाधिक क्षेत्र 117.68 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 118.52 लाख हेक्टेयर से 0.84 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि गिरावट सीमित रही है और कुल तिलहन क्षेत्र में सोयाबीन का सबसे बड़ा योगदान बना हुआ है।
इसके अलावा, मूंगफली की बुवाई 43.06 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 41.90 लाख हेक्टेयर से 1.16 लाख हेक्टेयर अधिक है। तिल का रकबा 9.27 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 8.17 लाख हेक्टेयर से 1.10 लाख हेक्टेयर अधिक है। वहीं, सूरजमुखी का रकबा 0.98 लाख हेक्टेयर रहा, जो पिछले वर्ष के 0.58 लाख हेक्टेयर की तुलना में 0.40 लाख हेक्टेयर अधिक है।
दूसरी ओर, अरंडी (Castor) की बुवाई 1.13 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 1.79 लाख हेक्टेयर से 0.66 लाख हेक्टेयर कम है। नाइजर का रकबा भी मामूली घटकर 0.10 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि अन्य तिलहन फसलों का क्षेत्र 0.10 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया।
देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून सक्रिय होने के साथ आने वाले सप्ताहों में कपास और तिलहन की बुवाई के अंतिम आंकड़ों में कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल, तिलहन का कुल रकबा पिछले वर्ष से अधिक है, जबकि कपास और सोयाबीन का क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में अभी भी कम बना हुआ है।
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