Recent News

सूरत टेक्सटाइल उद्योग को दुबई का बड़ा ऑफर

सूरत टेक्सटाइल को दुबई का बड़ा ऑफरग्लोबल मंदी, कच्चे तेल और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों के बीच सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को दुबई से बड़ा बिजनेस ऑफर मिला है। दुबई सरकार के एक हाई-लेवल डेलीगेशन ने सूरत पहुंचकर 450 से अधिक मिल मालिकों और इंडस्ट्रियलिस्ट्स के साथ बैठक की। इस दौरान दुबई में यूनिट, ऑफिस और ट्रेडिंग ऑपरेशन शुरू करने के लिए जमीन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आसान बिजनेस सेटअप की सुविधाओं की जानकारी दी गई।दुबई सरकार की ओर से एयरपोर्ट से करीब 10 मिनट की दूरी पर ट्रेडिंग और नॉन-पॉल्युटिंग यूनिट्स के लिए जमीन और रेडीमेड ऑफिस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। सिंगल-विंडो सिस्टम के जरिए जरूरी सरकारी अप्रूवल आसान तरीके से उपलब्ध कराने की बात भी कही गई है। सूरत एसोसिएशन के लिए बातचीत के आधार पर विशेष रेट या छूट की संभावना भी जताई गई है।साउथ गुजरात टेक्सटाइल प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट जीतू वखारिया के मुताबिक, सूरत की प्रोसेसिंग मिलों को दुबई शिफ्ट करने की योजना नहीं है। हालांकि, टेक्सटाइल निर्माता और ट्रेडर्स दुबई में ऑफिस खोलकर इंटरनेशनल खरीदारों तक सीधे पहुंच बना सकते हैं।सूरत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री में ओवरप्रोडक्शन भी बड़ी चुनौती है। एसोसिएशन के अनुसार, कुल उत्पादन का करीब 15 से 20 फीसदी हिस्सा घरेलू बाजार में खपाना मुश्किल होता है। ऐसे में दुबई को ट्रेडिंग हब बनाकर अतिरिक्त उत्पादन को नए विदेशी बाजारों में डायवर्ट करने की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।दुबई के टैक्स और बिजनेस सिस्टम को भी भारतीय कारोबारियों के लिए आकर्षण के रूप में पेश किया गया है। हालांकि, ड्यूटी और टैक्स से जुड़े लाभ संबंधित ट्रेड एग्रीमेंट, उत्पाद और बिजनेस स्ट्रक्चर पर निर्भर करेंगे। एसोसिएशन फिलहाल दुबई सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई बुकलेट का अध्ययन कर रही है, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर खुला।

19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

मानसून ने फिर बदली चाल: 19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, विदिशा में 6 सितंबर तक तेज बारिश के आसारदेशभर में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में बारिश का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, गुजरात, महाराष्ट्र, त्रिपुरा, असम, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना समेत 19 राज्यों में भारी बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है।विदिशा जिले में गुरुवार सुबह से रुक-रुककर रिमझिम और मध्यम बारिश हुई। मौसम विज्ञानी सतेन्द्र सिंह तोमर के अनुसार, जिले में फिलहाल 10 से 15 मिमी बारिश हो सकती है। इसके बाद 4, 5 और 6 सितंबर को तेज बारिश के आसार हैं। अगले चार से पांच दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।3 सितंबर तक विदिशा में औसतन 677.8 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य औसत 1075.5 मिमी है। यानी जिले में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम बारिश हुई है। लटेरी में सबसे ज्यादा 896.8 मिमी और गुलाबगंज में सबसे कम 417 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बेतवा नदी का जलस्तर 1352.30 फीट है, जो खतरे के निशान से 21.34 फीट नीचे है। सम्राट अशोक सागर जलाशय 76.64 प्रतिशत भर चुका है।वहीं महाराष्ट्र में 1 जून से 31 अगस्त तक 824.5 मिमी के मुकाबले 703.4 मिमी बारिश हुई है, जो सामान्य से 14.7 प्रतिशत कम है। राज्य के 15 जिलों में सामान्य बारिश का 75 प्रतिशत से भी कम पानी मिला है। छत्रपति संभाजीनगर मंडल में सामान्य का केवल 48.2 प्रतिशत, अमरावती में 72.6 प्रतिशत और नागपुर में 72.5 प्रतिशत बारिश हुई है।मध्य प्रदेश में आगामी बारिश से किसानों को राहत की उम्मीद है, जबकि महाराष्ट्र के कम बारिश वाले इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर खरीफ फसलों पर नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।और पढ़ें :- रुपया 19 पैसे गिरकर 94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

NCDEX-CAI की कपास डेरिवेटिव्स पर साझेदारी

NCDEX ने कॉटन डेरिवेटिव्स को बढ़ावा देने के लिए CAI से किया समझौताभारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के साथ पांच साल की रणनीतिक साझेदारी की है। इसका उद्देश्य कॉटन डेरिवेटिव्स में भागीदारी बढ़ाना, पारदर्शी प्राइस डिस्कवरी को बेहतर करना और किसानों, गिनर्स, स्पिनर्स, एक्सपोर्टर्स तथा ट्रेडर्स के बीच हेजिंग को लेकर जागरूकता बढ़ाना है।यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब भारत दुनिया के कुल कॉटन उत्पादन में करीब 20-23% हिस्सेदारी रखता है और वैश्विक कॉटन खेती के कुल रकबे में लगभग 38% योगदान देता है। हालांकि, बिखरे हुए फिजिकल मार्केट और डेरिवेटिव्स के सीमित इस्तेमाल के कारण वैश्विक स्तर पर कॉटन की कीमत तय करने में भारत की भूमिका अभी भी सीमित है।एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मुंबई में NCDEX के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO विकास गोयल तथा CAI के प्रेसिडेंट विनय कोटक ने 'लेटर ऑफ एंगेजमेंट' पर हस्ताक्षर किए। इस दौरान कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) के चेयरमैन-सह-मैनेजिंग डायरेक्टर ललित कुमार गुप्ता भी मौजूद रहे।साझेदारी के तहत NCDEX के कॉटन डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म को मजबूत किया जाएगा। फिलहाल इस प्लेटफॉर्म पर कपास, कॉटनसीड ऑयल केक और कॉटन वॉश ऑयल के कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं।दोनों संस्थाएं किसानों, गिनर्स, स्पिनर्स, एक्सपोर्टर्स और ट्रेडर्स के बीच फ्यूचर्स ट्रेडिंग को प्रभावी जोखिम प्रबंधन साधन के रूप में बढ़ावा देंगी।महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे प्रमुख कॉटन उत्पादक राज्यों में जागरूकता और अपनाने से जुड़े कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।और पढ़ें :- ब्राजील में कपास के भाव बढ़े

ब्राजील में कपास के भाव बढ़े

ग्लोबल डिमांड और सप्लाई के बीच संतुलन बिगड़ने से ब्राज़ील में कपास की कीमतें बढ़ींअगस्त के आखिर में ब्राज़ील में कपास की कीमतें बढ़ीं। इसकी वजह विक्रेताओं की मज़बूत पेशकश और इंटरनेशनल मार्केट में तेज़ी थी, हालांकि खरीदारों और विक्रेताओं के बीच कीमतों पर सहमति न बन पाने के कारण ट्रेडिंग सीमित रही।CEPEA/ESALQ कॉटन इंडेक्स 31 जुलाई से 31 अगस्त के बीच 3.83 प्रतिशत बढ़कर 4.3648 BRL प्रति पाउंड पर बंद हुआ। जिन खरीदारों को तुरंत कच्चे माल की ज़रूरत थी, उन्होंने खरीदारी में ज़्यादा दिलचस्पी दिखाई, खासकर अच्छी क्वालिटी वाले कपास की। हालांकि, कुछ खरीदार सतर्क रहे और कम कीमतें ऑफर कीं क्योंकि कच्चे माल की ज़्यादा लागत को तैयार माल की कीमतों में जोड़ना मुश्किल हो रहा था, जिससे लेन-देन कम ही हुआ।अगस्त के आखिर में इंटरनेशनल मार्केट में भी कपास की कीमतें मज़बूत हुईं। ICE फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स को मज़बूत US एक्सपोर्ट और पिछले साल की तुलना में फसल की खराब स्थिति से सहारा मिला। मार्केट को ग्लोबल खपत के उत्पादन से ज़्यादा होने और स्टॉक घटने से भी सहारा मिल रहा है।ब्राज़ील ने अगस्त के कुछ दिनों में 73.48 हज़ार टन लिंट का एक्सपोर्ट किया, जबकि एक साल पहले यह 77.46 हज़ार टन था। रोज़ाना का औसत 4.90 हज़ार टन रहा, जो साल-दर-साल 32.8 प्रतिशत ज़्यादा है, जबकि औसत एक्सपोर्ट कीमत 6.3 प्रतिशत बढ़कर 0.7690 USD प्रति पाउंड हो गई।2026-27 के लिए, USDA का अनुमान है कि ग्लोबल कपास उत्पादन 25.612 मिलियन टन और खपत 26.763 मिलियन टन होगी, जिससे एंडिंग स्टॉक 15.172 मिलियन टन बचेगा। उम्मीद है कि ब्राज़ील दुनिया का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर बना रहेगा, जिसका एक्सपोर्ट 3.3 मिलियन टन और उत्पादन 3.974 मिलियन टन होगा।2025-26 के लिए, Conab का अनुमान है कि ब्राज़ील का उत्पादन 4.08 मिलियन टन होगा। इसमें 2,024 kg/ha की रिकॉर्ड पैदावार ने खेती के रकबे में 3.2 प्रतिशत की कमी (जो 2.02 मिलियन हेक्टेयर हो गया) की भरपाई कर दी।और पढ़ें :- CCI कपास पंजीकरण शुरू

CCI कपास पंजीकरण शुरू

CCI कपास किसान रजिस्ट्रेशन शुरू; 7/12 पर कपास की एंट्री अपडेट नहीं तो क्या करें?अमरावती: कपास उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) ने 2026-27 कपास सीजन के लिए ‘कपास किसान’ मोबाइल ऐप पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू कर दिया है। किसान 1 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।CCI को कपास बेचने के लिए किसान का आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर और संबंधित खेत में बोई गई फसल का ऑनलाइन रिकॉर्ड जरूरी है। ऐसे में जिन किसानों के 7/12 उतारे पर इस साल की कपास फसल की एंट्री अभी अपडेट नहीं हुई है, उन्हें रजिस्ट्रेशन के दौरान परेशानी हो सकती है।पिछले साल किसान खुद ई-क्रॉप सर्वे यानी ई-पीक पाहणी के माध्यम से फसल की जानकारी दर्ज कर सकते थे। इस साल डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) का काम नियुक्त सर्वेक्षकों के माध्यम से किया जा रहा है। अमरावती जिले में 1,901 सर्वेक्षकों को 5,35,663 प्लॉट सौंपे गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभी तक करीब 11 प्रतिशत सर्वे पूरा हुआ है।सर्वे की धीमी गति के कारण कई किसानों के रिकॉर्ड में कपास की फसल की एंट्री अपडेट नहीं हुई है। हालांकि, प्रशासन ने किसानों को आश्वासन दिया है कि सर्वे का काम तेज किया जा रहा है। जिला कलेक्टर आशीष येरेकर के अनुसार, तलाठी एसोसिएशन के साथ बैठक के बाद प्रक्रिया में तेजी लाई गई है और करीब एक महीने में काम काफी हद तक पूरा होने की उम्मीद है।अगर 7/12 पर कपास की एंट्री नहीं है, तो किसान संबंधित तलाठी या राजस्व अधिकारी से संपर्क कर फसल रिकॉर्ड अपडेट कराने की जानकारी लें। आवश्यकता होने पर तहसीलदार से भी संपर्क किया जा सकता है।केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए मीडियम-स्टेपल कपास का MSP ₹8,267 और लॉन्ग-स्टेपल कपास का MSP ₹8,667 प्रति क्विंटल तय किया है। इसलिए किसानों को अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना अपना रिकॉर्ड और CCI रजिस्ट्रेशन समय पर पूरा कर लेना चाहिए।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे मजबूत होकर 94.30 पर खुला

यार्न महंगा, तिरुपुर निटवेयर लागत बढ़ी

यार्न की बढ़ती कीमतों से तिरुप्पुर में निटवेअर उत्पादन लागत 15% तक बढ़ीतिरुप्पुर: कॉटन यार्न की लगातार बढ़ती कीमतों ने तिरुप्पुर के निटवेअर उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। एक्सपोर्टर्स के मुताबिक, इस साल यार्न की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण निटवेअर की उत्पादन लागत करीब 15% तक बढ़ गई है। हालांकि, विदेशी खरीदार बढ़ी हुई कीमतों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं, जिससे अतिरिक्त लागत एक्सपोर्टर्स को खुद वहन करनी पड़ रही है।मंगलवार को कॉटन यार्न की विभिन्न किस्मों की कीमतों में 5 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हुई, जबकि कुछ स्पिनिंग मिलों ने कीमतें 7 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ाईं। उद्योग के अनुसार, साल की शुरुआत से कुछ यार्न किस्मों की कीमतों में 80 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की वृद्धि हो चुकी है।तिरुप्पुर एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट के एम सुब्रमण्यम ने कहा कि कॉटन की बढ़ती कीमतें यार्न महंगा होने की प्रमुख वजह हैं। उनके मुताबिक, साल की शुरुआत में 356 किलोग्राम की एक कैंडी कॉटन की कीमत 58,000 रुपये थी, जो अब बढ़कर 72,000 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जून से अक्टूबर तक कॉटन पर इंपोर्ट ड्यूटी अस्थायी रूप से हटाने के बावजूद कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं आई।SIHMA के प्रेसिडेंट एस शनमुगसुंदरम ने कहा कि कुछ कॉटन यार्न किस्मों की कीमतें इस साल 110 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ी हैं। उन्होंने केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप और यार्न एक्सपोर्ट को रेगुलेट करने की मांग की।उद्योग संगठनों ने चेतावनी दी है कि कीमतों में तेजी जारी रही तो तिरुप्पुर के निटवेअर सेक्टर और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।और पढ़ें :- करीमनगर में सूखे से कपास पर संकट

करीमनगर में सूखे से कपास पर संकट

सूखे से करीमनगर में कपास की फसल प्रभावित, 50% तक उत्पादन घटने की आशंकाकरीमनगर: बारिश की कमी और लगातार सूखे के कारण करीमनगर जिले में कपास की फसल की बढ़त प्रभावित हो रही है। किसानों को आशंका है कि यदि अगले दस दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो पैदावार में 50 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है।अल नीनो के प्रभाव के चलते कम बारिश की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार और कृषि विभाग ने किसानों से इस सीजन में धान की खेती से बचने और सिंचित सूखी (ID) फसलों की खेती करने की अपील की थी। हालांकि, इन अपीलों के बावजूद बड़े पैमाने पर धान की खेती की गई। जिन किसानों के पास जल स्रोत थे, उन्होंने धान की खेती की, जबकि अन्य किसानों ने कपास और दूसरी ID फसलें उगाईं। इस वर्ष जिले में करीब 46,000 एकड़ में कपास की बुवाई हुई है।किसानों के अनुसार, बारिश नहीं होने के कारण कपास के बीजों के अंकुरण में देरी हुई और बाद में भी पौधों की बढ़त प्रभावित होती रही। रामाडुगु मंडल के वेदिरा गांव के किसान मीसाला लचैया ने बताया कि उन्होंने जून के दूसरे सप्ताह में कपास बोई थी, लेकिन अंकुरण जुलाई के अंत में हुआ। उन्होंने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में इस समय तक पौधों की शाखाएं अधिक लंबी हो जानी चाहिए थीं। कम बढ़त के कारण फूलों की संख्या और अंततः पैदावार प्रभावित होने की आशंका है।लचैया की दो एकड़ फसल में लीफ़हॉपर का प्रकोप भी देखा गया है।गोलिरामायाहपल्ली के किसान नुगोंडा मल्लेशम ने कहा कि अगले दस दिन फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।कृषि विज्ञान केंद्र, जम्मीकुंटा के प्रमुख एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एन. वेंकटेश्वर राव ने कहा कि सूखे में पौधे पोषक तत्वों को पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पाते। लंबे समय तक नमी की कमी रहने पर पैदावार घट सकती है। कमजोर पौधों पर कीटों के हमले का खतरा भी बढ़ जाता है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के यावल में खरीफ़ फ़सलों पर संकट; बारिश न होने से फ़सलें सूख रही हैं

Related News

Youtube Videos

Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | Cotton Market Rate Today 12 Oct 2026
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | C...
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री रिपोर्ट | Weekly Cotton Market 10 Oct 2026
साप्ताहिक कपास बाज़ार में तेज़ी 😱 | CCI रुई गठानें बिक्री र...

Circular

title Created At Action
सूरत टेक्सटाइल उद्योग को दुबई का बड़ा ऑफर 04-09-2026 13:18:37 view
डॉलर के मुकाबले रुपया 2 पैसे मजबूत होकर 94.47 पर खुला। 04-09-2026 09:56:08 view
19 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट 03-09-2026 18:25:03 view
रुपया 19 पैसे गिरकर 94.49 प्रति डॉलर पर बंद हुआ 03-09-2026 15:50:18 view
NCDEX-CAI की कपास डेरिवेटिव्स पर साझेदारी 03-09-2026 11:49:26 view
ब्राजील में कपास के भाव बढ़े 03-09-2026 11:39:20 view
CCI कपास पंजीकरण शुरू 03-09-2026 11:35:20 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 67 पैसे मजबूत होकर 94.30 पर खुला 03-09-2026 09:34:50 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 08 पैसे गिरकर ₹94.97 पर बंद हुआ 02-09-2026 15:52:39 view
यार्न महंगा, तिरुपुर निटवेयर लागत बढ़ी 02-09-2026 13:29:11 view
करीमनगर में सूखे से कपास पर संकट 02-09-2026 12:48:40 view
Application Download
Whatsapp Contact