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मध्य प्रदेश: कपास की बंपर आवक, किसानों ने 80+ वाहन मंडी पहुंचाए

मध्य प्रदेश : कपास की बंपर आवक, किसान 80 से अधिक वाहन मंडी लाएबड़वानी: जिले में अब कपास की आवक लगातार बढ़ रही है। भारतीय कपास निगम (सीसीआई) के किसानों से सीधे कपास खरीदी शुरू कर देने के बाद कृषि उपज मंडी में हलचल और भी तेज हो गई है। रोजाना जिले के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में किसान अपने वाहन लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि रोजाना करीब 100 वाहन कपास की मंडी में आ रही है।गुरुवार दोपहर 12 बजे तक लगभग 80 वाहनों की आवक दर्ज की गई। मंडी में आने वाले किसानों का कहना है कि इस बार मौसम के असर से फसल की गुणवत्ता में कुछ उतार-चढ़ाव जरूर दिखा है लेकिन खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। सीसीआई की ओर से तय किए गए भाव के अनुसार इस समय किसानों को 7690 से 8010 रुपए प्रति क्विंटल तक का भाव मिल रहा है। गुणवत्ता और नमी के आधार पर भाव में अंतर देखा जा रहा है। मंडी प्रबंधन के अनुसार शुरुआती दिनों की तुलना में आवक में और वृद्धि होने की संभावना है, क्योंकि खेतों में अधिकांश क्षेत्रों में तुड़ाई का काम तेजी से चल रहा है।इस बार सीसीआई ने खरीदी को लेकर कुछ नए नियम भी लागू किए हैं। निगम के निर्देशों के अनुसार सिर्फ जिले में निवास करने वाले और पंजीकृत किसान ही अपना कपास बेच सकेंगे। इससे खरीदी व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय किसानों को प्राथमिकता मिलेगी। मंडी परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और तौल प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं। किसानों को कतारबद्ध तरीके से प्रवेश दे रहे हैं। ताकि भीड़भाड़ से किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। कृषि विभाग का अनुमान है कि आगामी दिनों में कपास की आवक अपने चरम पर पहुंच सकती है। सीसीआई से की जा रही खरीदी किसानों के लिए राहत लेकर आई है और उन्हें अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद बढ़ी है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र में किसानों की HTBT कपास पर से बैन हटाने की मांग

महाराष्ट्र में किसानों की HTBT कपास पर से बैन हटाने की मांग

महाराष्ट्र: नुकसान में, किसानों ने HTBT कॉटन पर बैन हटाने की मांग कीयवतमाल: पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माने जाने वाले HTBT कॉटन की खेती पर पूरे देश में बैन है। इसके बावजूद, हज़ारों किसान गैर-कानूनी तरीके से इस किस्म की खेती कर रहे हैं। किसान यूनियन का आरोप है कि इस प्रोसेस में किसानों का शोषण हो रहा है। उन्होंने सरकार से किसानों के लगातार आर्थिक शोषण को रोकने के लिए HTBT खेती के लिए कानूनी इजाज़त देने की मांग की है।महाराष्ट्र कॉटन उगाने वाले बड़े राज्यों में से एक है। अकेले विदर्भ में, यवतमाल ज़िले में लगभग 5 लाख हेक्टेयर में कॉटन की खेती होती है। मौसम की खराब हालत और दूसरी वजहों से हाल के सालों में कॉटन की पैदावार में काफी गिरावट आई है। साथ ही, कॉटन की कीमतें अस्थिर रही हैं, और प्रोडक्शन की बढ़ती लागत मार्केट रेट से मेल नहीं खा रही है।कुल इनपुट लागत को देखते हुए, कई किसान HTBT कॉटन पसंद करते हैं।इस साल, विदर्भ में लगभग 40% कॉटन की खेती HTBT होने का अनुमान है। किसानों को इसे गैर-कानूनी तरीके से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, और अक्सर वे धोखाधड़ी का शिकार हो जाते हैं।किसान यूनियन के एक्टिविस्ट विजय निवाल ने कहा, "हम सालों से HTBT कॉटन की खेती कर रहे हैं। पैदावार अच्छी होती है, और सबसे ज़रूरी बात यह है कि फसल का मैनेजमेंट आसान होता है।पहले, एक हेक्टेयर कॉटन की निराई के लिए लगभग 75 मज़दूरों की ज़रूरत होती थी, जिसका खर्च लगभग 15,000 होता था। लेकिन HTBT के साथ, खर्च सिर्फ़ लगभग 2,500 प्रति हेक्टेयर है। इससे समय बचता है और फसल की एक जैसी ग्रोथ होती है।"उन्होंने कहा, "इस साल, यवतमाल ज़िले में लगभग 40% किसानों ने HTBT कॉटन चुना। यह वैरायटी किसानों के लिए आसान और किफ़ायती है। लेकिन क्योंकि किसानों को गैर-कानूनी तरीके से HTBT बीज खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, इसलिए उनके साथ धोखा होने का खतरा रहता है, जिससे उन्हें भारी फ़ाइनेंशियल नुकसान होता है। इसलिए, सरकार को HTBT खेती को लीगल कर देना चाहिए।"और पढ़ें :- रुपया 08 पैसे गिरकर 89.38/USD पर खुला

भारत के टेक्सटाइल निर्यात में 111 देशों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 111 देशों में रिकॉर्ड ग्रोथ.अप्रैल और सितंबर 2025 के बीच 111 देशों में भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में साल-दर-साल ग्रोथ दर्ज की गई, जो US मार्केट पर ज़्यादा निर्भरता कम करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव दिखाता है। रूबिक्स डेटा साइंसेज़ की भारत के टेक्सटाइल सेक्टर पर लेटेस्ट इंडस्ट्री इनसाइट्स रिपोर्ट के अनुसार, 40 प्रायोरिटी वाले देशों में सरकार की मदद से भारतीय टेक्सटाइल के इंपोर्ट में 50 परसेंट से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है, जिसमें 38 मार्केट में 50 परसेंट से ज़्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है।इस डायवर्सिफिकेशन में एक बड़ा कैटेलिस्ट जुलाई 2025 में साइन किया गया भारत-UK FTA है, जो भारत के टेक्सटाइल और कपड़ों के एक्सपोर्ट के 99 परसेंट तक ड्यूटी-फ्री एक्सेस देता है। इस खास एक्सेस से 2030 तक UK को भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्ट में 30-45 परसेंट की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, और इससे देश को तीन साल के अंदर UK में अपने होम टेक्सटाइल मार्केट शेयर को दोगुना करने में मदद मिल सकती है।भारत का टेक्सटाइल सेक्टर विस्तार के एक नए दौर में जा रहा है, लेकिन यह सालों में दुनिया भर में सबसे उथल-पुथल वाले हालात में से एक है। भारतीय सामान पर अमेरिका के 50 परसेंट तक के भारी टैरिफ ने अमेरिका में भारतीय टेक्सटाइल और कपड़ों के इंपोर्ट पर असरदार रेट को 63.9 परसेंट तक बढ़ा दिया है। इससे इंडस्ट्री को अपनी ग्लोबल मौजूदगी बढ़ाने और नए मार्केट में नई रफ़्तार पकड़ने के लिए बढ़ावा मिला है।भारत की बढ़ती ग्लोबल मौजूदगी को घरेलू फंडामेंटल्स का सहारा मिल रहा है। FY25 में $174 बिलियन की वैल्यू वाला टेक्सटाइल और कपड़ों का सेक्टर FY31 तक $350 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, जो 12.4 परसेंट CAGR से बढ़ रहा है। हालांकि, इस ग्रोथ को बनाए रखने के लिए ज़्यादा स्थिर ग्लोबल ट्रेड माहौल की ज़रूरत होगी, खासकर भारत के सबसे बड़े एक्सपोर्ट मार्केट, US में।फिर भी, इस सेक्टर में टेक्निकल टेक्सटाइल के तेज़ी से बढ़ने से एक बड़ा बदलाव हो रहा है, जो इसका सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला सेगमेंट है। हेल्थकेयर, मोबिलिटी, डिफेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर में एप्लीकेशन की वजह से यह मार्केट 2024 में $29 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $123 बिलियन हो जाएगा। FY25 में टेक्निकल टेक्सटाइल एक्सपोर्ट $2.9 बिलियन तक पहुंच गया, जो 8 परसेंट CAGR से बढ़ रहा है, जिसमें पैकटेक और इंडुटेक मिलकर एक्सपोर्ट वॉल्यूम का लगभग दो-तिहाई हिस्सा हैं।इस बीच, भारत का घरेलू फैशन कंजम्पशन लैंडस्केप भी तेजी से बदल रहा है। ऑनलाइन कपड़ों की बिक्री FY25 में 17 परसेंट बढ़ने और FY30 तक 15 परसेंट CAGR बनाए रखने का अनुमान है, साथ ही क्विक कॉमर्स भी फैशन कैटेगरी में आ रहा है। भारत ग्लोबल रिटेलर्स के लिए एक आकर्षक मार्केट बना हुआ है: रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 में 27 इंटरनेशनल ब्रांड देश में आए, जो पिछले साल की संख्या से दोगुना है।2020 और 2024 के बीच DPIIT से मान्यता प्राप्त टेक्सटाइल स्टार्टअप्स की संख्या 3.7 गुना बढ़ी, जबकि अपैरल-ब्रांड स्टार्टअप्स ने 2025 (अक्टूबर तक) में $120 मिलियन जुटाए, जो साल-दर-साल 2.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी है।यह इंडस्ट्री देश में दूसरी सबसे बड़ी एम्प्लॉयर है, इसलिए सरकार 2025 के दूसरे हाफ में कई सपोर्टिव उपायों के ज़रिए ग्लोबल उतार-चढ़ाव के असर को कम करने के लिए पक्की है। इनमें मुख्य पॉलिएस्टर रॉ मटीरियल पर QCOs को रद्द करना शामिल है, जिससे लागत लगभग 30 परसेंट बढ़ गई थी, ₹450 बिलियन का एक्सपोर्ट सपोर्ट पैकेज, और 31 दिसंबर, 2025 तक ड्यूटी-फ्री कॉटन इंपोर्ट को बढ़ाना शामिल है। ये कदम ऐसे समय में उठाए गए हैं जब घरेलू कॉटन प्रोडक्शन में तेज़ी से गिरावट आई है, 2014-15 में 386 लाख बेल से घटकर 2024-25 में 294.25 लाख बेल हो गया है, और इसी दौरान इंपोर्ट लगभग दोगुना हो गया है। BIS कंटैमिनेशन स्टैंडर्ड पर क्लैरिटी अभी भी पेंडिंग है और एक्सपोर्टर्स के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।रूबिक्स डेटा साइंसेज के को-फाउंडर और CEO मोहन रामास्वामी ने कहा, "भारत का टेक्सटाइल सेक्टर सालों में अपने सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहा है।" “टैरिफ, बदलती ग्लोबल डिमांड, सस्टेनेबिलिटी का दबाव और ज़बरदस्त कॉम्पिटिशन माहौल को बदल रहे हैं। लेकिन इंडस्ट्री तेज़ी से जवाब दे रही है, नए मार्केट में बढ़ रही है, टेक्नोलॉजी में इन्वेस्ट कर रही है, वैल्यू चेन में ऊपर जा रही है और सर्कुलरिटी को अपना रही है। रूबिक्स में, हमारा मिशन बिज़नेस को इस उतार-चढ़ाव को समझने, रिस्क को पहले से मैनेज करने और तेज़ी से बदलती ग्लोबल इकॉनमी में भरोसे के साथ फैसले लेने के लिए ज़रूरी इंटेलिजेंस देना है।”जैसे-जैसे भारत ग्लोबल लेवल पर ज़्यादा कॉम्पिटिटिव टेक्सटाइल हब बनने की ओर बढ़ रहा है, रूबिक्स डेटा साइंसेज का कहना है कि इनोवेशन, टेक्नोलॉजी अपनाने, रॉ मटेरियल की सिक्योरिटी और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग में लगातार इन्वेस्टमेंट बहुत ज़रूरी होगा। बढ़ते एक्सपोर्ट डायवर्सिफिकेशन, इन्वेस्टर की बढ़ती दिलचस्पी और डिजिटल रिटेल चैनल के बढ़ने के साथ, भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री देश की मैन्युफैक्चरिंग-लेड ग्रोथ के अगले फेज़ को आगे बढ़ाने के लिए अच्छी स्थिति में है।और पढ़ें :- रुपया 10 पैसे गिरकर 89.30 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

एमपी के 1.25 लाख किसानों को 249 करोड़ की सौगात

एमपी के सवा लाख से ज्यादा किसानों को बड़ी सौगात, सरकार ने खातों में डाले 249 करोड़ रुपएBhavantar- मध्यप्रदेश के किसानों को राज्य सरकार ने बड़ी सौगात दी है। उनके खातों में 249 करोड़ रुपए डाले गए हैं। भावांतर योजना के तहत सोयाबीन किसानों को यह राशि दी गई है। प्रदेश के सवा लाख से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिलेगा। सीएम डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों को एक क्लिक से भावांतर की राशि ट्रांसफर की। उन्होंने इंदौर के देपालपुर विधानसभा के गौतमपुरा में आयोजित कार्यक्रम में किसानों के खातों में सोयाबीन भावांतर योजना के पैसे डाले। इससे पहले गौतमपुरा में सीएम मोहन यादव ने रोड शो किया जिसमें बड़ी संख्या में लोग आए। आमजन ने फूलों से सीएम का स्वागत किया।प्रदेश के सोयाबीन किसानों को हर हाल में एमएसपी का लाभ दिलाने के लिए भावांतर योजना 2025 योजना लागू की गई है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार ने सोयाबीन के एमएसपी की गारंटी दी है। मंडियों में सोयाबीन का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम मिलने की स्थिति में शेष राशि का भुगतान राज्य सरकार कर रही है।गौतमपुरा में सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत सीएम मोहन यादव ने 249 करोड़ रुपए की राशि अंतरित की। प्रदेश के कुल 1 लाख 34 हजार किसानों के बैंक खातों में यह राशि डाली गई है। किसानों के खातों में राशि अंतरण के साथ ही सीएम ने यहां विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भूमिपूजन किया।26 नवंबर को 4265 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेटइधर भावांतर योजना में 26 नवंबर को 4265 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपना सोयाबीन मंडी में बेचा है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। मॉडल रेट और न्यूनतम समर्थन मूल्य के भावांतर की राशि राज्य सरकार द्वारा दी जा रही है।बता दें कि सोयाबीन का पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए, 17 नवंबर को 4236 रुपए, 18 नवंबर को 4255 रुपए, 19 नवंबर को 4263 रुपए, 20 नवंबर को 4267 रुपए, 21 नवंबर को 4271 रुपए, 22 नवंबर को 4285 रुपए, 23 व 24 नवंबर को 4282 रुपए और 25 नवंबर को 4277 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी हुआ था। योजना में राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी।और पढ़ें :- मध्य प्रदेश: MSP विरोध में किसानों ने कपास खेतों में छोड़े मवेशी

मध्य प्रदेश: MSP विरोध में किसानों ने कपास खेतों में छोड़े मवेशी

मध्य प्रदेश : किसानों ने कपास की फसल में मवेशी छोड़ा, MSP के लिए खंडवा जाने से किया इनकार.बुरहानपुर: लोनी गांव के किसान सुनील महाजन ने अपने खेत में लगी कपास की फसल में मवेशी घुसा दिए. उन्होंने 2 एकड़ में लगी खड़ी कपास मवेशियों को खिला दी. बुरहानपुर में केला उत्पादक किसानों के बाद अब कपास उत्पादक किसान भी अपनी कपास को बाजार या मंडी में बेचने के बजाए अपनी खड़ी फसलें मवेशियों को खिलाने के लिए मजबूर हो गए हैं.एमएसपी के लिए खंडवा ले जानी पड़ रही कपासकिसान सुनील महाजन ने 2 एकड़ में कपास की फसल लगाई थी. लेकिन समर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी बुरहानपुर में नहीं होकर खंडवा में किए जाने से नाराज किसान ने अपनी कपास की फसल को मवेशियों को खिला कर नष्ट कर दी है. किसान इसे मजबूरी और विरोध दोनों बता रहा है. कपास की फसल को मवेशियों को खिलाने का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.बुरहानपुर में एमएसपी पर कपास खरीदी की मांगसमर्थन मूल्य पर कपास की खरीदी सीसीआई द्वारा खंडवा में की जा रही है, लेकिन किसान को अपनी फसल बुरहानपुर से खंडवा ले जाना काफी भारी पड़ रहा है. उन पर परिवहन का भार बढ़ गया है. जिसके चलते किसान ने मवेशियों को कपास में छोड़ दिया. अब पीड़ित किसान ने सरकार से यह मांग की है कि कपास की समर्थन मूल्य पर बुरहानपुर में ही खरीदी व्यवस्था की जाए.8200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है कपास का एमएसपीबुरहानपुर में 16 हजार हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में कपास लगाई गई है. इस साल सरकार ने कपास का समर्थन मूल्य 8200 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन बुरहानपुर के किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ नहीं मिल पा रहा है. समर्थन मूल्य पर कपास बेचने में परिवहन शुल्क देने की शर्त ने किसानों की परेशानियां बढ़ा दी है. बुरहानपुर के किसानों को कॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया यानी सीसीआई के खंडवा खरीदी केंद्र तक कपास पहुंचाने के लिए परिवहन शुल्क देना होगा. इससे स्थानीय किसानों ने इनकार कर दिया है.विरोध स्वरूप मवेशियों को खेत में छोड़ाकिसानों ने सीसीआई की शर्त नहीं मानी और विरोध स्वरूप फसल नष्ट करने के लिए मवेशियों को खेत में चरने के लिए छोड़ दिया है. कपास किसान सुनील महाजन का कहना है कि "सरकार को कपास उत्पादक किसानों की सुध लेनी चाहिए, ताकि किसानों को आर्थिक संकट से जूझना न पड़े. यदि सरकार ने जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाए, तो कपास उत्पादक किसानों को कपास की फसल से मोह भंग हो जाएगा. मजबूरन किसानों को दूसरी खेती की तरफ रुख अपनाना पड़ेगा, इससे कपास उत्पादन में कमी आएगी, भविष्य में कपास से निर्मित वस्तुओं के निर्माण में कठिनाई हो सकती है.और पढ़ें :- रुपया 07 पैसे बढ़कर 89.20 पर खुला

अब CCI खरीदेगी उत्पादन के अनुसार कपास

14 क्विंटल की बाध्यता खत्म, अब CCI खरीदेगी कपास किसानों के उत्पादन के अनुसारकपास उत्पादक किसानों के लिए राहत की खबर है। भारतीय कपास निगम (CCI) ने जिले में कपास खरीदी नीति में बदलाव किया है। अब तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 14.01 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की सीमा के अनुसार ही कपास खरीदी जा रही थी। इससे अधिक उत्पादन वाले किसानों को शेष कपास खुले बाजार में कम दाम में बेचनी पड़ती थी।भास्कर ने 26 अक्टूबर को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था, जिसके बाद शासन स्तर से CCI को किसानों के वास्तविक उत्पादन के अनुसार कपास खरीदी करने के आदेश दिए गए।कृषि विभाग के डी.डी.ए. एस.एस. राजपूत ने बताया कि उत्पादन का प्रमाण पत्र संबंधित क्षेत्र के कृषि अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा। मंगलवार को खरगोन केंद्र में दिनेश पटेल, बड़वाह केंद्र में रेखा शाह और कविता शाह को प्रमाण पत्र जारी किए गए। अब यह सुविधा किसानों के हित में लागू हो गई है और वे अपने उत्पादन के अनुसार सही मूल्य पर कपास बेच सकेंगे।स्लॉट बुकिंग में बदलावकपास खरीदी के लिए स्लॉट सोमवार से शुक्रवार सुबह 10:30 बजे से बुक किए जाएंगे। पहले शादियों के सीजन और किसानों के बोवनी के चलते स्लॉट मिनटों में भर जाते थे, जिससे कई किसानों को परेशानी होती थी। अब हर किसान जिस दिन स्लॉट बुक करेगा, अगली सप्ताह उसी दिन उसे उपलब्ध होगा।मंडी समिति ने किसानों से अपील की है कि यदि किसी कारण से वे बुक किए गए दिन कपास नहीं ला पाए, तो स्लॉट कैंसल कर दें, ताकि अन्य किसानों को अवसर मिल सके।और पढ़ें :- “2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

“2025–26 खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान जारी”

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने जारी किए 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमानमुख्य फसलों में रिकॉर्ड वृद्धि; कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 173.33 मिलियन टन रहने का अनुमानकृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज वर्ष 2025–26 के खरीफ फसलों के पहले अग्रिम उत्पादन अनुमान जारी किए, जिनमें देशभर में कुल फसल उत्पादन में रिकॉर्ड वृद्धि का अनुमान व्यक्त किया गया है।अनुमानों के अनुसार, कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन 3.87 मिलियन टन बढ़कर 173.33 मिलियन टन तक पहुँचने की संभावना है। यह वृद्धि अनुकूल मानसून और बेहतर फसल प्रबंधन के सकारात्मक प्रभाव को दर्शाती है।🔹 कपास उत्पादन — मजबूत प्रदर्शन जारीवर्ष 2025–26 में कपास उत्पादन 29.22 मिलियन गांठ (प्रत्येक गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो क्षेत्रीय मौसमीय विविधताओं के बावजूद स्थिर और सशक्त प्रदर्शन को दर्शाता है। यह निरंतर उत्पादन देश के टेक्सटाइल और निर्यात क्षेत्रों को सशक्त करने में सहायक होगा।🔹 तेलबीज और सोयाबीन उत्पादन — मजबूत वृद्धि की संभावनावर्ष 2025–26 के लिए कुल खरीफ तेलबीज उत्पादन 27.56 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जो इस क्षेत्र के ठोस प्रदर्शन को दर्शाता है।मूंगफली (ग्राउंडनट): 11.09 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 0.68 मिलियन टन अधिक है।सोयाबीन: 14.27 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिससे यह देश की प्रमुख खरीफ तेलबीज फसल के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करता है।ये अनुमान तेलबीज क्षेत्र में मजबूत सुधार और विस्तार को दर्शाते हैं, जो भारत के खाद्य तेल आत्मनिर्भरता लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करते हैं।🔹 समग्र फसल प्रदर्शनश्री चौहान ने कहा कि यद्यपि कुछ क्षेत्रों को अत्यधिक वर्षा से चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन अधिकांश इलाकों में संतुलित मानसूनी वितरण से प्रमुख उत्पादक राज्यों में फसल वृद्धि को बल मिला है।खरीफ धान — 124.50 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले वर्ष से 1.73 मिलियन टन अधिक है।खरीफ मक्का— 28.30 मिलियन टन रहने का अनुमान, जो पिछले सत्र से 3.50 मिलियन टन अधिक है।मोटे अनाज — 41.41 मिलियन टन रहने का अनुमान।दलहन — 7.41 मिलियन टन रहने का अनुमान, जिसमेंतुर (अरहर) — 3.60 मिलियन टन,उड़द — 1.20 मिलियन टन,मूंग — 1.72 मिलियन टन शामिल हैं।ये अनुमान पिछले वर्षों की उत्पादकता प्रवृत्तियों, क्षेत्रीय अवलोकनों, फील्ड रिपोर्टों तथा राज्य सरकारों से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। अंतिम संशोधन फसल कटाई प्रयोग (CCE) के आंकड़े उपलब्ध होने के बाद किए जाएंगे।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे गिरकर 89.27 प्रति डॉलर पर बंद हुआ

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