Recent News

गुजरात: अमरेली में भारी बारिश से कपास की फसल खराब, किसानों ने शुरू की दोबारा बुवाई

गुजरात: अमरेली में भारी बारिश से कपास की दोबारा बुआईअमरेली (गुजरात): अमरेली ज़िले में हुई भारी बारिश और खेतों में जलभराव के कारण कपास की बुआई को बड़ा नुकसान पहुंचा है। केरिया चाव सहित कई गांवों में पहले चरण की बुआई का बड़ा हिस्सा खराब हो जाने से किसान अब दोबारा बुआई करने में जुट गए हैं। बारिश थमने के बाद खेतों में मज़दूरों और कृषि उपकरणों की मदद से तेज़ी से दोबारा बुआई का काम शुरू कर दिया गया है।किसानों के अनुसार, लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया, जिससे कपास के बीज मिट्टी में दब गए और उनका अंकुरण नहीं हो सका। ट्रैक्टर से की गई पहली बुआई का लगभग 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा प्रभावित हुआ है। ऐसे में किसानों के पास दोबारा बुआई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।हालांकि बारिश रुकने के बाद खेतों में काम फिर से शुरू हो गया है, लेकिन किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ गई है। दोबारा बुआई के लिए उन्हें नए बीज खरीदने के साथ-साथ अतिरिक्त मज़दूरी का खर्च भी उठाना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत लगभग दोगुनी हो गई है। किसान अब समय पर फसल बचाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।किसान हितेन्द्रभाई मालविया ने बताया कि पहली बुआई में केवल लगभग 40 प्रतिशत सफलता मिली थी। भारी बारिश और जलभराव के कारण अधिकांश फसल प्रभावित हो गई, जिसके चलते दोबारा बुआई करनी पड़ रही है। उन्होंने कहा, "मैंने पहले 22 बीघा में कपास की बुआई की थी, लेकिन नुकसान के बाद अब 30 से 35 बीघा क्षेत्र में फिर से बुआई कर रहा हूं।"किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहा, तो दोबारा बोई गई कपास की फसल से नुकसान की कुछ भरपाई होने की उम्मीद है। हालांकि लगातार बदलते मौसम और बढ़ती खेती लागत ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।और पढ़ें :- खरीफ बुवाई में तेजी, कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से कम

खरीफ बुवाई में तेजी, कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से कम

खरीफ़ बुआई में तेजी, लेकिन कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से काफी कमदक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने से देशभर में खरीफ़ फसलों की बुआई में तेजी आई है, लेकिन कपास और तिलहन की बुआई अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में पीछे चल रही है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा 10 जुलाई 2026 तक जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, हाल के सप्ताह में बारिश बढ़ने से बुआई की रफ्तार में सुधार हुआ है, फिर भी इन दोनों प्रमुख नकदी फसलों का रकबा पिछले साल के स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।सरकारी आंकड़ों के अनुसार, तिलहन की बुआई 117.83 लाख हेक्टेयर (11.78 मिलियन हेक्टेयर) में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 149.18 लाख हेक्टेयर थी। यानी तिलहन का कुल रकबा 31.35 लाख हेक्टेयर या लगभग 21 प्रतिशत कम है। तिलहन फसलों में सोयाबीन की हिस्सेदारी सबसे अधिक रही, जिसकी बुआई 90.51 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 107.72 लाख हेक्टेयर थी, यानी सोयाबीन का रकबा 17.21 लाख हेक्टेयर घटा है। वहीं मूंगफली का रकबा भी 35.45 लाख हेक्टेयर से घटकर 23.40 लाख हेक्टेयर रह गया है।कपास की बुआई 79.54 लाख हेक्टेयर (7.95 मिलियन हेक्टेयर) में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 93.95 लाख हेक्टेयर थी। इस प्रकार कपास का रकबा 14.41 लाख हेक्टेयर, यानी लगभग 15.3 प्रतिशत, कम दर्ज किया गया है। हालांकि महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश और तेलंगाना जैसे प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में हाल की बारिश से बुआई में तेजी आई है, लेकिन कुल क्षेत्रफल अब भी पिछले वर्ष से पीछे बना हुआ है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, अगले छह से सात दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में वर्षा की गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है। ऐसे में वर्षा पर निर्भर इलाकों में कपास और तिलहन की बुआई की गति प्रभावित हो सकती है।दूसरी ओर, जल संसाधनों की स्थिति में सुधार हुआ है। सरकार की निगरानी वाले 166 प्रमुख जलाशयों में 9 जुलाई तक जल भंडारण बढ़कर उनकी लाइव स्टोरेज क्षमता के 32.38 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो एक सप्ताह पहले 26 प्रतिशत था। बेहतर जल उपलब्धता से सिंचाई वाले क्षेत्रों में फसलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में मानसून की सक्रियता कपास और तिलहन की बुआई और संभावित उत्पादन के लिए निर्णायक रहेगी। यदि बारिश सामान्य रहती है तो बुआई का अंतर और कम हो सकता है, जबकि लंबे समय तक कमजोर मानसून इन दोनों फसलों के उत्पादन पर दबाव बढ़ा सकता है।और पढ़ें :- राजस्थान ने 2030 तक वस्त्र निर्यात चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा, विशेष एक्शन प्लान तैयार

राजस्थान ने 2030 तक वस्त्र निर्यात चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा, विशेष एक्शन प्लान तैयार

2030 तक राजस्थान का टेक्सटाइल निर्यात 4 गुना बढ़ाने का लक्ष्य, सरकार ने तैयार की विशेष कार्ययोजनाराजस्थान सरकार ने टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर को राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बनाने के लिए बड़े स्तर पर योजनाएं शुरू की हैं। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की मंशा के अनुरूप उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने सेक्टर आधारित करीब 15 नई नीतियां लागू की हैं। इसी कड़ी में राजस्थान टेक्सटाइल एवं अपैरल नीति-2025 के बेहतर क्रियान्वयन और निवेश को बढ़ावा देने के लिए राज्य स्तरीय डेडिकेटेड टेक्सटाइल सेल का गठन किया गया है।राज्य में पहली बार टेक्सटाइल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश स्तरीय और 11 जिलों के लिए जिला स्तरीय टेक्सटाइल एक्सपोर्ट एक्शन प्लान तैयार किया गया है। इस योजना में भारत सरकार द्वारा चिन्हित 7 चैंपियन जिले—अजमेर, भीलवाड़ा, जयपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जोधपुर और कोटा—के अलावा चार एस्पिरेशनल जिले श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, नागौर और चूरू शामिल किए गए हैं।उद्योग एवं वाणिज्य आयुक्त नीलाभ सक्सेना ने बताया कि टेक्सटाइल सेल राज्य में उद्योगों की जरूरतों को समझने और उन्हें आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए काम करेगा। सेल औद्योगिक क्षेत्रों का नियमित दौरा कर उत्पादन और निर्यात से जुड़ी बाधाओं की पहचान करेगा। इसके साथ ही उद्योग विशेषज्ञों, उद्यमियों और निर्यातकों के साथ संवाद कर समाधान तैयार किए जाएंगे।उन्होंने बताया कि सेल देश-विदेश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों का अध्ययन करेगा और नवीनतम तकनीकों की जानकारी उद्योगों तक पहुंचाएगा। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय टेक्सटाइल प्रदर्शनियों में राजस्थान की भागीदारी बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का संग्रह और विश्लेषण भी किया जाएगा। इसी वर्ष अक्टूबर में दो दिवसीय टेक्सटाइल समिट आयोजित करने का प्रस्ताव भी है।राज्य सरकार ने राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना (RIPS) के तहत टेक्सटाइल क्षेत्र को थ्रस्ट सेक्टर घोषित किया है, जिसके तहत उद्योगों को अतिरिक्त प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं।सक्सेना के अनुसार, भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक वस्त्र एवं परिधान निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में राजस्थान ने अपने टेक्सटाइल निर्यात को 3 से 4 गुना बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।वर्ष 2024-25 में राजस्थान से कुल निर्यात 97,171 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जिसमें टेक्सटाइल और इससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान लगभग 13,500 करोड़ रुपये रहा। यह राज्य के कुल निर्यात का 13 प्रतिशत से अधिक है।राजस्थान ऊन उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है और करीब 47 प्रतिशत योगदान देता है, जबकि कपास उत्पादन में पांचवें स्थान पर है। प्रदेश में वर्तमान में 1,800 से अधिक टेक्सटाइल और अपैरल इकाइयां संचालित हैं। हैंडब्लॉक प्रिंटिंग, पारंपरिक तकनीकों और विविध वस्त्र उत्पादों के कारण राजस्थान का टेक्सटाइल उद्योग अंतरराष्ट्रीय बाजार में विशेष पहचान रखता है। सरकार अब निवेश, तकनीक और निर्यात विस्तार के जरिए इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे मजबूत होकर 96.17 पर खुला

कर्नाटक में ₹50,000 मुआवजे की मांग

सूखे से प्रभावित किसानों के लिए ₹50,000 प्रति एकड़ मुआवजे की मांग, बीवाई विजयेंद्र ने कर्नाटक सरकार को घेराकर्नाटक BJP अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र ने उत्तर कर्नाटक और कल्याण कर्नाटक क्षेत्र में सूखे की स्थिति को लेकर राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सूखे से जूझ रहे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है और प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक सहायता देने में विफल रही है।13 जुलाई को एयरपोर्ट पर आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विजयेंद्र ने बीदर, कलबुर्गी और यादगीर सहित कई जिलों में किसानों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में बारिश में भारी कमी के कारण कृषि गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। उनके मुताबिक, कई इलाकों में बारिश सामान्य से काफी कम रही है, जिससे किसान बुवाई तक नहीं कर पाए हैं।विजयेंद्र ने दावा किया कि बारिश की कमी के कारण 30 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खेती नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि अरहर (तुअर), सूरजमुखी और कपास जैसी प्रमुख फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है और कई परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।उन्होंने राज्य सरकार से सूखे से प्रभावित किसानों के लिए प्रति एकड़ कम से कम ₹50,000 मुआवजा देने की मांग की। विजयेंद्र ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के हालिया बसवकल्याण दौरे को “सिर्फ फोटो शूट” बताते हुए कहा कि सरकार को जमीनी स्तर पर किसानों की मदद के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।BJP नेता ने पूर्व मुख्यमंत्री बी. एस. येदियुरप्पा के नेतृत्व वाली पिछली BJP सरकार के कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस समय क्षेत्र के विकास के लिए करीब ₹500 करोड़ की परियोजनाएं शुरू की गई थीं और चरणबद्ध तरीके से ₹100 करोड़ तथा ₹200 करोड़ की राशि जारी की गई थी। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि मौजूदा कांग्रेस सरकार पिछले तीन वर्षों से इन योजनाओं को नजरअंदाज कर रही है।उन्होंने मुख्यमंत्री से लंबित धनराशि तुरंत जारी करने और विकास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपील की।बीदर जिला BJP में कथित अंदरूनी मतभेदों के सवाल पर विजयेंद्र ने कहा कि पार्टी सभी स्थानीय मुद्दों को बातचीत और आपसी सहमति से सुलझाएगी। उन्होंने BJP विधायकों और कांग्रेस के बीच किसी भी तरह की “एडजस्टमेंट पॉलिटिक्स” के आरोपों को खारिज किया और कहा कि BJP जनता और किसानों के हितों के लिए एक मजबूत विपक्ष की भूमिका निभा रही है।आगामी जिला पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए विजयेंद्र ने संगठन को और सक्रिय करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि जिला नेताओं, विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर रणनीति बनाई जाएगी।और पढ़ें :- अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे गिरकर 96.20 पर बंद हुआ।

खंडेश में घटी कपास की खेती, किसान मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़े

महाराष्ट्र के खानदेश में कपास का रकबा घटा, मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़ा किसानों का रुझानजलगांव/महाराष्ट्र: खरीफ सीजन में महाराष्ट्र के खानदेश क्षेत्र में इस साल खेती के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर खरीफ फसलों की बुवाई करीब 81 प्रतिशत पूरी हो चुकी है, वहीं दूसरी ओर कपास की खेती का रकबा लगातार घट रहा है। कपास की बढ़ती लागत, बाजार में कमजोर भाव और कीटों के बढ़ते प्रकोप के कारण किसान अब मक्का, सोयाबीन और अरहर (तूर) जैसी वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।खासकर जलगांव जिले में कपास की खेती का क्षेत्र पिछले सीजन की तुलना में करीब 25,000 हेक्टेयर कम हुआ है। वर्ष 2024-25 में जिले में कपास की खेती लगभग 5.11 लाख हेक्टेयर में की गई थी, जबकि इस साल यह घटकर करीब 4.55 लाख हेक्टेयर रह गई है।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खानदेश के अन्य जिलों में भी कपास का रकबा कम हुआ है। धुले जिले में इस वर्ष कपास की खेती करीब 1.75 लाख हेक्टेयर में हो रही है, जबकि पिछले सीजन में यह क्षेत्र लगभग 2 लाख हेक्टेयर था। वहीं, नंदुरबार जिले में कपास का रकबा घटकर करीब 85,000 हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले साल 97,000 हेक्टेयर से अधिक था।किसानों के अनुसार, कपास की खेती में खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उत्पादन के मुकाबले बाजार भाव संतोषजनक नहीं मिल रहे हैं। मजदूरी, खाद, बीज और कीटनाशकों की बढ़ती कीमतों ने किसानों की लागत बढ़ा दी है। इसके अलावा, गुलाबी सुंडी (पिंक बॉलवर्म) के प्रकोप और मौसम में बदलाव ने भी कपास उत्पादकों की चिंता बढ़ाई है।मॉनसून की बारिश में देरी ने भी कई किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर जाने के लिए मजबूर किया है। इस बदलाव का असर मक्का और अन्य खरीफ फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि के रूप में दिखाई दे रहा है। अकेले जलगांव जिले में मक्का की खेती का रकबा करीब 10,000 हेक्टेयर बढ़ा है।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष पूरे खानदेश क्षेत्र में कपास का कुल रकबा 8 लाख हेक्टेयर से कम रह सकता है। किसानों का फसल चयन अब लागत, जोखिम और बाजार की संभावनाओं को ध्यान में रखकर बदल रहा है।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 32 पैसे टूटकर 95.94 पर खुला.

कमजोर मानसून से तेलंगाना की खरीफ फसल संकट में, 63% मंडल प्रभावित

तेलंगाना में मॉनसून की बेरुखी से खरीफ सीजन पर संकट, 63% मंडल बारिश की कमी से प्रभावितहैदराबाद: तेलंगाना में इस वर्ष कमजोर मॉनसून ने खरीफ सीजन की तस्वीर धुंधली कर दी है। जुलाई के पहले सप्ताह के अंत तक पिछले वर्ष की तुलना में अधिक क्षेत्र में बुवाई और रोपाई होने के बावजूद, राज्य के अधिकांश हिस्सों में वर्षा की भारी कमी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त और लगातार बारिश नहीं हुई, तो फसलों की वृद्धि, उत्पादन और किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ सकता है।राज्य के 32 ग्रामीण जिलों के 605 मंडलों में से 382 मंडल (करीब 63 प्रतिशत) मॉनसून की विफलता से प्रभावित हैं। मौसम विभाग ने जुलाई के शेष दिनों में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है, जिससे खरीफ फसलों की संभावनाओं पर संकट के बादल और गहरे हो गए हैं। लगातार कम वर्षा के कारण जलग्रहण क्षेत्रों में स्थित बड़े, मध्यम और छोटे सिंचाई जलाशयों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचा है, जिससे सिंचाई व्यवस्था भी प्रभावित होने लगी है।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष अब तक खरीफ फसलों की खेती का रकबा 55.32 लाख एकड़ तक पहुंच गया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 52.04 लाख एकड़ था। फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो किसानों ने सबसे अधिक 39.44 लाख एकड़ में कपास की बुवाई की है। इसके अलावा 4.22 लाख एकड़ में धान की रोपाई, 3.35 लाख एकड़ में सोयाबीन, 3.19 लाख एकड़ में अरहर, 2.84 लाख एकड़ में मक्का तथा लगभग 46 हजार एकड़ में मूंग और उड़द की खेती की गई है।तेलंगाना डेवलपमेंट प्लानिंग सोसाइटी के अनुसार, 68 मंडलों में सामान्य से 60 से 99 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 327 मंडलों में वर्षा सामान्य से 20 से 59 प्रतिशत कम रही। केवल 181 मंडलों में वर्षा सामान्य श्रेणी में दर्ज की गई, लेकिन इनमें भी अधिकांश क्षेत्रों में सामान्य से 19 प्रतिशत तक कम बारिश हुई। दूसरी ओर, केवल 45 मंडलों में सामान्य से अधिक या अत्यधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई है। इनमें से 11 मंडल रंगारेड्डी, नलगोंडा, नागरकुरनूल, विकाराबाद, संगारेड्डी, सूर्यापेट और भद्राद्री-कोठागुडेम जिलों में स्थित हैं।राज्यभर में औसतन वर्षा सामान्य से 25 प्रतिशत कम रही है। सबसे अधिक कमी हनुमाकोंडा जिले में दर्ज की गई, जबकि हैदराबाद सहित 25 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई। हालांकि पिछले वर्ष अच्छी वर्षा के कारण भूजल स्तर स्थिर बना हुआ है। जून 2025 में औसत भूजल स्तर 9.46 मीटर रहा, जो पिछले वर्ष जून के 9.47 मीटर के लगभग बराबर है।संभावित संकट को देखते हुए कृषि विभाग ने आकस्मिक कार्ययोजना तैयार की है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जुलाई के दूसरे सप्ताह के अंत तक पर्याप्त बारिश नहीं होती, तो किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही, कृषि वैज्ञानिक किसानों को कम पानी वाली फसलों और मौसम आधारित खेती अपनाने की सलाह भी दे रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।और पढ़ें :- कमजोर मानसून से नासिक में खरीफ बुवाई प्रभावित, 45% कृषि भूमि अब भी बिना बोई

Related News

Youtube Videos

आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Today 14 Oct 2026
आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Tod...
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | Cotton Market Rate Today 12 Oct 2026
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | C...

Circular

title Created At Action
गुजरात: अमरेली में भारी बारिश से कपास की फसल खराब, किसानों ने शुरू की दोबारा बुवाई 15-07-2026 13:28:00 view
खरीफ बुवाई में तेजी, कपास और तिलहन का रकबा अब भी पिछले साल से कम 15-07-2026 13:16:15 view
राजस्थान ने 2030 तक वस्त्र निर्यात चार गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा, विशेष एक्शन प्लान तैयार 15-07-2026 12:43:19 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 3 पैसे मजबूत होकर 96.17 पर खुला 15-07-2026 11:15:36 view
कर्नाटक में ₹50,000 मुआवजे की मांग 14-07-2026 16:48:56 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 26 पैसे गिरकर 96.20 पर बंद हुआ। 14-07-2026 15:56:13 view
राज्यवार CCI कपास बिक्री 14-07-2026 12:38:09 view
खंडेश में घटी कपास की खेती, किसान मक्का और सोयाबीन की ओर बढ़े 14-07-2026 12:20:26 view
कमजोर मानसून से तेलंगाना की खरीफ फसल संकट में, 63% मंडल प्रभावित 14-07-2026 11:58:16 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 32 पैसे टूटकर 95.94 पर खुला. 14-07-2026 09:26:31 view
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 8 पैसे मजबूत होकर 95.62 पर बंद 13-07-2026 15:58:27 view
Application Download
Whatsapp Contact