Recent News

कमजोर मानसून से नासिक में खरीफ बुवाई प्रभावित, 45% कृषि भूमि अब भी बिना बोई

नासिक डिवीजन में बुवाई पर बारिश की मार, 45% कृषि क्षेत्र अब भी खालीनासिक रोड: नासिक डिवीजन में कमजोर और असमान मानसून के कारण खरीफ सीजन प्रभावित होता नजर आ रहा है। पिछले सप्ताह कुछ इलाकों में हुई बारिश से किसानों को राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में लगातार और पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बुवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है। मॉनसून शुरू हुए करीब डेढ़ महीना बीत जाने के बावजूद मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से बड़ी संख्या में किसान अब भी बुवाई का इंतजार कर रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, डिवीजन की कुल कृषि योग्य भूमि के लगभग 45 प्रतिशत हिस्से में अब तक बुवाई नहीं हो सकी है।बढ़ती कृषि लागत ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। बीज, उर्वरक, खेत की तैयारी और मजदूरी पर होने वाला खर्च पहले की तुलना में काफी बढ़ चुका है। ऐसे में किसान कम नमी वाली जमीन में बुवाई का जोखिम नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि यदि पर्याप्त बारिश के बिना बुवाई की गई, तो बीज खराब होने और दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है, जिससे लागत दोगुनी हो जाएगी। यही कारण है कि अधिकांश किसान अच्छी और लगातार बारिश का इंतजार कर रहे हैं।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नासिक डिवीजन में खरीफ फसलों का औसत रकबा 20.33 लाख हेक्टेयर है। इसके मुकाबले अब तक केवल 11.23 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई पूरी हो पाई है, यानी लगभग 55 प्रतिशत क्षेत्र में खेती शुरू हुई है, जबकि शेष 45 प्रतिशत क्षेत्र अब भी खाली है। नासिक और नंदुरबार जिले सबसे अधिक प्रभावित माने जा रहे हैं।विभाग ने किसानों को मौसम का पूर्वानुमान देखकर ही बुवाई करने की सलाह दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मिट्टी में पर्याप्त नमी होने के बाद ही बीज बोए जाएं और उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाए। यदि सूखे जैसी स्थिति बनी रहती है, तो किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराई जाएगी।इस बीच, नगरसुल के सेवानिवृत्त शिक्षक अंकुश निवृत्ति निकम ने खेती की लागत कम करने के लिए आधुनिक मशीनों के उपयोग का उदाहरण पेश किया है। उन्होंने इंटर-कल्टिवेशन के लिए मैकेनिकल वीडर खरीदा है, जिससे एक एकड़ में गुड़ाई का काम केवल एक लीटर पेट्रोल में पूरा हो जाता है। उनके अनुसार, जहां बैलों से यही काम कराने पर करीब 1,600 रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है, वहीं मशीन से यह लागत घटकर लगभग 100 रुपये रह जाती है। यह मशीन प्रतिदिन तीन से चार एकड़ क्षेत्र में काम कर सकती है, जिससे मजदूरी पर होने वाला खर्च भी काफी कम हो जाता है।निकम ने किसानों से खेती में आधुनिक मशीनों को अपनाने की अपील की है। वहीं स्थानीय सोसायटी के प्रभाकर जगन्नाथ कुडके ने सरकार से मांग की है कि बड़े ट्रैक्टरों की तरह छोटे ट्रैक्टरों और इंटर-कल्टिवेशन मशीनों पर भी सब्सिडी दी जाए, ताकि अधिक किसान आधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर खेती की लागत कम कर सकें।और पढ़ें :- कपास की खेती पर ₹14,000 से ₹27,000 तक सहायता, जानें कौन उठा सकता है योजना का लाभ

कपास की खेती पर ₹14,000 से ₹27,000 तक सहायता, जानें कौन उठा सकता है योजना का लाभ

कपास की खेती के लिए ₹14,000 से ₹27,000 तक की सहायता, जानिए कौन उठा सकता है योजना का लाभदेश में कपास का उत्पादन बढ़ाने, आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय में वृद्धि करने के उद्देश्य से भारत सरकार ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक "मिशन फॉर कॉटन प्रोडक्टिविटी (कपास क्रांति मिशन)" शुरू किया है। इस मिशन के तहत आधुनिक खेती की तकनीकों को बढ़ावा देकर कपास की उत्पादकता में सुधार लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी क्रम में गुजरात सरकार ने राज्य में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ₹134.80 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है।गुजरात देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार ने इस योजना के तहत कपास की खेती वाले 21 जिलों में 1 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र को कवर करने का लक्ष्य तय किया है। कच्छ जिले में पिछले वर्ष 77,760 हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई थी, जबकि इस वर्ष बारिश के कारण अब तक केवल 48 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है।योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को i-Khedut पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन करने वाले किसान का पंजीकृत होना और सरकार द्वारा अनुमोदित या प्रमाणित Bt कपास के बीज का उपयोग करना अनिवार्य है।सरकार दो आधुनिक खेती तकनीकों को अपनाने वाले किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगी। इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट (ICM) के तहत 90×60 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करने वाले किसानों को प्रति खाते ₹14,000 तक की इनपुट सहायता मिलेगी। वहीं क्लोज़ स्पेसिंग टेक्नोलॉजी (CST) के तहत 90×30 सेंटीमीटर की दूरी पर बुवाई करने पर प्रति खाते ₹27,000 तक की सहायता दी जाएगी। दोनों ही मामलों में सहायता की अधिकतम सीमा 2 हेक्टेयर तक निर्धारित की गई है।इस योजना के लिए आवेदन 10 जुलाई 2026 से शुरू हो चुके हैं और 24 जुलाई 2026 तक किए जा सकते हैं। योजना का लाभ केवल गुजरात के कच्छ, राजकोट, जामनगर, छोटा उदेपुर, गिर सोमनाथ, अमरेली, सुरेंद्रनगर, भावनगर, बोटाद, भरूच, अहमदाबाद, वडोदरा, साबरकांठा, नर्मदा, मेहसाणा, बनासकांठा, अरावली, गांधीनगर, मोरबी, जूनागढ़ और पाटन जिलों के किसानों को मिलेगा।आवेदन के लिए आधार कार्ड, 7/12 और 8-A भूमि रिकॉर्ड, बैंक पासबुक या रद्द चेक की प्रति तथा आधार से लिंक सक्रिय मोबाइल नंबर आवश्यक हैं। सरकार का उद्देश्य इस योजना के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना, उत्पादन बढ़ाना और कपास की खेती को अधिक लाभकारी बनाना है।और पढ़ें :- पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का खतरा बढ़ा

पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का खतरा बढ़ा

पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का बढ़ा खतरापंजाब के कपास उत्पादक जिलों में व्हाइटफ्लाई (सफेद मक्खी) और पिंक बॉलवर्म (गुलाबी सुंडी) के शुरुआती हमले के संकेत मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल दोनों कीटों का प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा (इकोनॉमिक थ्रेशोल्ड लेवल-ETL) से नीचे है, लेकिन अगले 15–20 दिनों तक खेतों की नियमित निगरानी जरूरी होगी।यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कपास का रकबा घटकर करीब 80,000 हेक्टेयर रह गया है, जो दक्षिण मालवा क्षेत्र में अब तक का सबसे कम क्षेत्र माना जा रहा है। जुलाई में बारिश की कमी, लगातार गर्मी और बढ़ी हुई उमस ने कीटों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना दी हैं।स्थिति का जायजा लेने के लिए राज्य कृषि विभाग, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) और कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की टीमें दक्षिण-पश्चिम पंजाब के जिलों में लगातार सर्वेक्षण कर रही हैं। वैज्ञानिक खेतों में कीटों की संख्या पर नजर रखने के साथ किसानों को बचाव और प्रबंधन संबंधी सलाह भी दे रहे हैं।फाजिल्का जिले, जहां इस सीजन में पंजाब के कुल कपास क्षेत्र का लगभग आधा हिस्सा (करीब 40,000 हेक्टेयर) है, वहां व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म दोनों के मामले सामने आए हैं। मुख्य कृषि अधिकारी कुलवंत सिंह ने बताया कि कुछ खेतों में व्हाइटफ्लाई का स्पष्ट हमला देखा गया है, जबकि कुछ स्थानों पर पिंक बॉलवर्म भी मिला है। हालांकि स्थिति अभी नियंत्रण में है।मुक्तसर जिले में किसानों को शुरुआती अवस्था में व्हाइटफ्लाई के नियंत्रण के लिए नीम आधारित जैविक कीटनाशकों के उपयोग की सलाह दी गई है। वहीं बठिंडा में कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ाते हुए जोधपुर रोमाना और यात्री गांवों को व्हाइटफ्लाई के हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया है। कुछ फेरोमोन ट्रैप में पिंक बॉलवर्म की मौजूदगी भी दर्ज की गई है।PAU के मुख्य कीट विज्ञानी विजय कुमार ने कहा कि फिलहाल फसल को कोई गंभीर नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो अगले दो सप्ताह में कीटों की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बारिश होने पर व्हाइटफ्लाई की आबादी कम हो सकती है। विशेषज्ञों ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने, रासायनिक कीटनाशकों का अंधाधुंध उपयोग न करने और किसी भी छिड़काव से पहले कृषि अधिकारियों की सलाह लेने की अपील की है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र ने खरीफ 2026 के लिए मराठवाड़ा के तीन जिलों में कपास उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया

महाराष्ट्र ने खरीफ 2026 के लिए मराठवाड़ा के तीन जिलों में कपास उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया

महाराष्ट्र: मराठवाड़ा के तीन जिलों में खरीफ 2026 के लिए कपास की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्यमहाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र के छत्रपति संभाजीनगर, जालना और बीड जिलों में खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि विभाग ने कपास (रुई) की औसत उत्पादकता 3.69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखने का लक्ष्य प्रस्तावित किया है। विभाग का अनुमान है कि आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए इस वर्ष प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार में सुधार किया जा सकता है। इसी योजना के तहत सोयाबीन की औसत उत्पादकता 16.06 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रहने का भी अनुमान लगाया गया है।कृषि विभाग के अनुसार, इन तीनों जिलों में खरीफ सीजन के दौरान 21.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हालांकि, मानसून की धीमी शुरुआत के कारण 7 जुलाई तक केवल 11.64 लाख हेक्टेयर में ही बुआई पूरी हो सकी थी। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 18.40 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी। प्रस्तावित क्षेत्र में छत्रपति संभाजीनगर का 6.17 लाख हेक्टेयर, जालना का 6.46 लाख हेक्टेयर और बीड का 7.92 लाख हेक्टेयर शामिल है।पिछले खरीफ सीजन (2025) में कपास की औसत उत्पादकता 3.33 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई थी। वहीं, सोयाबीन की उत्पादकता 14.42 क्विंटल, मक्का 25.11 क्विंटल, अरहर 11.51 क्विंटल और उड़द 8.66 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रही थी। कृषि विभाग को उम्मीद है कि बेहतर बीज, संतुलित उर्वरक उपयोग और वैज्ञानिक खेती अपनाने से इस वर्ष उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।छत्रपति संभाजीनगर कृषि मंडल के अंतर्गत तीन जिले, 28 तालुके और 3,751 गांव आते हैं। इस मंडल का कुल भौगोलिक क्षेत्र 28.48 लाख हेक्टेयर है, जबकि 23.76 लाख हेक्टेयर भूमि खेती योग्य है। यहां लगभग 21.77 लाख किसान कृषि कार्य से जुड़े हैं।हालांकि, मौसम इस सीजन की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। मानसून में देरी, कई क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश और एल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को समय पर बीज, उर्वरक और वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराने पर जोर दे रहा है। विभाग का मानना है कि मौसम अनुकूल रहने पर इस वर्ष खरीफ फसलों की उत्पादकता में सुधार संभव है।और पढ़ें :- कल्याण कर्नाटक में सूखे का संकट, खरीफ फसलों की पैदावार 30% तक घटने की आशंका

कल्याण कर्नाटक में सूखे का संकट, खरीफ फसलों की पैदावार 30% तक घटने की आशंका

कल्याण कर्नाटक में सूखे से खरीफ फसलों पर संकट, 30% तक उत्पादन घटने की आशंकाकलबुर्गी/यादगीर/बीदर: कल्याण कर्नाटक में लगातार बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों पर सूखे का गंभीर असर पड़ रहा है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, जिन क्षेत्रों में बुआई पूरी हो चुकी है, वहां मिट्टी में नमी की कमी और फसलों की धीमी वृद्धि के कारण उत्पादन में लगभग 30% तक गिरावट की आशंका है। तूर, मूंग, काला चना, मक्का, कपास, सोयाबीन और सूरजमुखी जैसी प्रमुख फसलें या तो अंकुरित नहीं हो पाई हैं या सूखने लगी हैं।राज्यभर में खरीफ बुआई लक्ष्य के मुकाबले अभी तक केवल 48% पूरी हुई है, जबकि कल्याण कर्नाटक में यह आंकड़ा 43% है। सबसे अधिक प्रभावित विजयनगर जिले में पिछले 35 दिनों से बारिश नहीं हुई है और यहां केवल 30% क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है। जिले के संयुक्त कृषि निदेशक डी. टी. मंजूनाथ ने चेतावनी दी कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पहले से बोई गई 80 से 90% फसलें भी नष्ट हो सकती हैं।कृषि विभाग के निदेशक डॉ. जी. टी. पुत्रा ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्रों में वर्षा की स्थिति भिन्न होने से फसलों की हालत भी अलग है। उन्होंने आशंका जताई कि मौजूदा सूखा कपास और तूर उत्पादन बढ़ाने के लिए पिछले वर्षों में किए गए सरकारी प्रयासों को प्रभावित कर सकता है। रायचूर और यादगीर जैसे कपास उत्पादक जिलों में भी उत्पादन घटने का खतरा बना हुआ है।कलबुर्गी जिले के किसान हनुमंतप्पा बेलागुम्पी ने बताया कि हल्की बारिश के बाद उन्होंने तूर और कपास की बुआई की थी, लेकिन इसके बाद बारिश नहीं होने से फसलें अब तक अंकुरित नहीं हुई हैं। हालांकि कृषि विभाग का कहना है कि यदि जल्द बारिश होती है तो 15 अगस्त तक तूर और कपास की बुआई की जा सकती है।कोप्पल जिले में मूंग और सूरजमुखी की फसलें सूखने लगी हैं, जबकि बीदर जिले की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है। किसानों को राहत देने के लिए जिला प्रशासन और कृषि विभाग प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पंजीकरण अभियान तेज कर रहे हैं, ताकि नुकसान की स्थिति में अधिक से अधिक किसानों को आर्थिक सहायता मिल सके।और पढ़ें :- रुपया डॉलर के मुकाबले 38 पैसे गिरकर 95.70 पर खुला.

CCI ने कपास भाव ₹800 बढ़ाए

CCI ने कपास की कीमतें ₹800 बढ़ाईं; साप्ताहिक बिक्री बढ़कर 1.73 लाख गांठें हुईंकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 26 जून, 2026 को समाप्त हुए सप्ताह के दौरान कपास की बिक्री कीमतों में ₹800 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। नीलामी में टेक्सटाइल मिलों और कपास व्यापारियों की ज़बरदस्त भागीदारी देखी गई, जिसके परिणामस्वरूप 2025–26 फसल सीज़न से कुल साप्ताहिक बिक्री लगभग 1,73,900 गांठों की हुई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 06 जुलाई, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत 9,200 गांठों की बिक्री के साथ हुई। मिलों ने 3,400 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 5,800 गांठें उठाईं।07 जुलाई, 2026 (मंगलवार):इस दिन सप्ताह की सबसे ज़्यादा बिक्री दर्ज की गई, जिसमें कुल 70,200 गांठें बिकीं। मिलों ने 28,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 41,400 गांठें खरीदीं।08 जुलाई, 2026 (बुधवार):CCI की नीलामी बिक्री 61,000 गांठों की रही। मिलों ने 40,500 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 20,500 गांठें उठाईं।09 जुलाई, 2026 (गुरुवार):बिक्री और घटकर 13,500 गांठें रह गई। मिलों ने 7,800 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 5,700 गांठें खरीदीं।10 जुलाई, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन 20,000 गांठों की बिक्री के साथ हुआ। मिलों ने 10,400 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 9,600 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री का अपडेटनवीनतम नीलामियों के साथ, 2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कपास बिक्री 81,86,800 गांठों तक पहुँच गई है।

गुजरात का ₹134.80 करोड़ कॉटन मिशन

गुजरात ने ₹134.80 करोड़ के कपास उत्पादकता मिशन को मंज़ूरी दी; किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹14,000 तक मिलेंगेगुजरात सरकार ने राज्य में 'कपास उत्पादकता मिशन' (कॉटन रेवोल्यूशन मिशन) लागू करके कपास का उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार करने के लिए एक बड़ी पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भारत सरकार के उस महत्वाकांक्षी पांच-वर्षीय मिशन के तहत इस कार्यक्रम को मंज़ूरी दी है, जिसका उद्देश्य कपास की उत्पादकता बढ़ाना, आयात कम करना और खेती के आधुनिक तरीकों को बढ़ावा देना है।कृषि मंत्री जीतूभाई वघाणी ने कहा कि केंद्र ने 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए यह मिशन शुरू किया है। भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में से एक होने के नाते, गुजरात को चालू वर्ष के लिए ₹134.80 करोड़ आवंटित किए गए हैं। राज्य का लक्ष्य कपास उगाने वाले 21 ज़िलों में एक लाख हेक्टेयर से अधिक ज़मीन को इस कार्यक्रम के दायरे में लाना है।इस मिशन के तहत, उन किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी जो कपास की खेती के वैज्ञानिक और आधुनिक तरीकों को अपनाएंगे।जो किसान 'क्लोज़र स्पेसिंग टेक्नोलॉजी' (पौधों के बीच कम दूरी रखने की तकनीक) अपनाएंगे, जिसमें कपास को 90 cm × 30 cm की दूरी पर लगाया जाता है, उन्हें इनपुट सहायता के तौर पर प्रति हेक्टेयर ₹14,000 मिलेंगे। जो किसान 90 cm × 60 cm के पैटर्न के साथ 'इंटीग्रेटेड क्रॉप मैनेजमेंट' (ICM) का पालन करेंगे, वे प्रति हेक्टेयर ₹7,500 पाने के हकदार होंगे।हालांकि, यह लाभ एक साल में प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर ज़मीन के लिए ही मिलेगा।इस योजना का लाभ उठाने के लिए, किसानों को सरकार द्वारा मंज़ूर या प्रमाणित कपास की किस्मों या मंज़ूरशुदा Bt कॉटन बीजों की खेती करनी होगी। उन्हें 'किसान रजिस्ट्री' में भी पंजीकृत होना होगा, जो इस मिशन के तहत लाभ पाने के लिए ज़रूरी है।आर्थिक सहायता के अलावा, सरकार पूरे साल विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगी ताकि किसानों को खेती की बेहतर तकनीकें अपनाने, उत्पादकता बढ़ाने और फसल की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सके।कृषि मंत्री ने कहा कि इस पहल से भारत के प्रमुख कपास उत्पादक राज्य के तौर पर गुजरात की स्थिति मज़बूत होने की उम्मीद है, साथ ही खेती के बेहतर तरीकों से किसानों को बेहतर आमदनी भी सुनिश्चित होगी। योग्य किसान अब i-Khedut पोर्टल के ज़रिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं, जो 10 जुलाई, 2026 से आवेदन के लिए खोल दिया गया है। सरकार ने इच्छुक किसानों से आग्रह किया है कि वे 'कॉटन प्रोडक्टिविटी मिशन' के तहत मिलने वाले लाभों का फ़ायदा उठाने के लिए तय समय-सीमा के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन पूरा करें और आवेदन जमा करें।और पढ़ें :- सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि

सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि

सेंधवा ब्लॉक में 64% खरीफ बोवनी पूरी, मक्का के बाद कपास की खेती की ओर बढ़ा किसानों का रुझानसेंधवा: मानसून के सक्रिय होने के साथ ही मध्य प्रदेश के सेंधवा ब्लॉक में खरीफ फसलों की बोवनी ने रफ्तार पकड़ ली है। कृषि विभाग के अनुसार, अब तक 38,426 हेक्टेयर क्षेत्र में बोवनी पूरी हो चुकी है, जो कुल 60,097 हेक्टेयर खरीफ रकबे का लगभग 64 प्रतिशत है। विभाग का अनुमान है कि मौसम अनुकूल रहने पर अगले एक सप्ताह में शत-प्रतिशत बोवनी पूरी हो जाएगी।कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष किसानों का रुझान मक्का के साथ-साथ कपास की खेती की ओर भी बढ़ा है। अब तक 14,170 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की बोवनी की जा चुकी है। पिछले वर्ष इसी अवधि में मक्का का रकबा 21,800 हेक्टेयर था। वहीं, नकदी फसल कपास की बोवनी इस सीजन में 7,581 हेक्टेयर तक पहुंच चुकी है, जबकि पिछले वर्ष यह 10,830 हेक्टेयर रही थी।तिलहनी फसलों में सोयाबीन की बोवनी 5,246 हेक्टेयर क्षेत्र में दर्ज की गई है। दलहनी फसलों में अरहर 2,370 हेक्टेयर, उड़द 2,365 हेक्टेयर और मूंग 2,289 हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई है। इसके अलावा ज्वार की बोवनी 2,744 हेक्टेयर में पूरी हो चुकी है। कृषि विभाग का कहना है कि आगामी दिनों में बारिश जारी रहने पर शेष क्षेत्र में भी तेजी से बोवनी पूरी होने की संभावना है।इस बार कपास की खेती में उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को हाई डेंसिटी प्लांटिंग सिस्टम (एचडीपीएस) तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिला प्रशासन और कृषि विभाग किसानों को इस आधुनिक पद्धति का प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस तकनीक के तहत कम दूरी पर अधिक पौधे लगाए जाते हैं, जिससे प्रति हेक्टेयर पौधों की संख्या बढ़ती है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन, समय पर सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और पौधों की टॉपिंग जैसी वैज्ञानिक विधियों से बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।सेंधवा कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) डी.एस. गणावा ने बताया कि ब्लॉक में अब तक 64 प्रतिशत से अधिक खरीफ बोवनी पूरी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा और नियमित बारिश होती रही, तो अगले एक सप्ताह में पूरे ब्लॉक में खरीफ फसलों की बोवनी का कार्य पूर्ण होने की उम्मीद है।और पढ़ें :-मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती

मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती

मनावर में खरीफ बोवनी लगभग पूरी, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती; बारिश से फसलों को मिला फायदामनावर: मध्य प्रदेश के मनावर क्षेत्र में खरीफ सीजन की बोवनी लगभग पूरी हो चुकी है। इस वर्ष किसानों ने करीब 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में प्रमुख खरीफ फसलों की बुआई की है। इनमें लगभग 21 हजार हेक्टेयर में कपास और 7 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सोयाबीन की खेती की गई है। पिछले 24 घंटों में हुई एक इंच से अधिक बारिश से खेतों में पर्याप्त नमी बनी है, जिससे फसलों की शुरुआती बढ़वार को बड़ा लाभ मिला है।कृषि विभाग के अनुसार, समय पर सक्रिय हुए मानसून के कारण किसानों ने निर्धारित अवधि के भीतर बोवनी का कार्य पूरा कर लिया। हाल की बारिश से विशेष रूप से सोयाबीन की फसल का अंकुरण बेहतर हुआ है और खेतों में पौधों की वृद्धि संतोषजनक दिखाई दे रही है।कृषि विभाग के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) महेश बर्मन ने बताया कि शुरुआती चरण में मिली नमी फसलों के विकास के लिए बेहद लाभदायक है। उन्होंने कहा कि अब अधिकांश किसान खरपतवार नियंत्रण, कीट एवं रोग प्रबंधन के लिए आवश्यक दवाइयों का छिड़काव शुरू कर चुके हैं। समय पर किए गए इन कृषि कार्यों से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बेहतर होने की संभावना बढ़ जाती है।स्थानीय किसान राजू देवड़ा ने बताया कि मंगलवार शाम से शुरू हुई बारिश बुधवार तक लगातार जारी रही। दिनभर आसमान में बादल छाए रहने से किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश होगी। उनका कहना है कि यदि जुलाई के शेष दिनों में भी पर्याप्त वर्षा होती रही तो कपास और सोयाबीन दोनों फसलों की बढ़वार अच्छी रहेगी और उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना बनेगी।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि फसल की शुरुआती अवस्था में पर्याप्त नमी मिलना अच्छी पैदावार के लिए महत्वपूर्ण होता है। कृषि विभाग ने किसानों को खेतों का नियमित निरीक्षण करने, जलभराव से बचाव करने तथा खरपतवार, कीट और रोगों के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नियंत्रण उपाय अपनाने की सलाह दी है। अधिकारियों के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से फसल प्रबंधन और समय पर देखभाल से उत्पादन लागत कम करने के साथ बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है। किसान भी मौसम की अनुकूल स्थिति को देखते हुए आगामी दिनों में फसलों की नियमित निगरानी और आवश्यक कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं।और पढ़ें :- बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे

जुलाई में तेज हुई कपास की बुआई, फिर भी पिछले साल से पीछे; बेहतर मॉनसून से बढ़ी रफ्तारनई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दोबारा सक्रिय होने से देशभर में जुलाई के दौरान कपास (कॉटन) की बुआई में तेजी आई है। हालांकि, बुआई का कुल रकबा अभी भी पिछले वर्ष की तुलना में कम बना हुआ है। कृषि आयुक्त पी.के. सिंह ने बताया कि बेहतर बारिश के कारण प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में बुआई की गति बढ़ी है और आने वाले दिनों में यह अंतर और कम होने की उम्मीद है।कृषि आयुक्त के अनुसार, 5 जुलाई तक देश में 63.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुआई हो चुकी थी, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 82 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार शुरुआत धीमी रही, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश के बाद किसानों ने तेजी से बुआई शुरू कर दी है।उन्होंने बताया कि भारत में कपास की बुआई अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर होती है। इसकी शुरुआत पंजाब और हरियाणा से होती है और बाद में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु तक फैलती है। सामान्य परिस्थितियों में कपास की बुआई 15 जुलाई तक पूरी हो जाती है, लेकिन इस वर्ष मॉनसून में देरी के कारण इसकी अंतिम तिथि बढ़ाकर 30 जुलाई कर दी गई है।अहमदाबाद के एक कृषि व्यापारी के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में हाल के दिनों में अच्छी बारिश होने से कपास की बुआई में उल्लेखनीय तेजी आई है। उन्होंने बताया कि बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कुछ किसान धान की जगह कपास और दलहनी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। वहीं महाराष्ट्र में कई किसानों ने सोयाबीन की कमजोर अंकुरण की शिकायत के बाद दोबारा कपास की बुआई शुरू की है।भारत के प्रमुख कपास उत्पादक क्षेत्रों में गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश का केंद्रीय क्षेत्र सबसे महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु भी प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।कृषि मंत्रालय के नवीनतम अनुमान के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का कपास उत्पादन 290.91 लाख गांठ (प्रति गांठ 170 किलोग्राम) रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 297.24 लाख गांठ से कम है।पी.के. सिंह ने बताया कि खरीफ सीजन में बुआई की सबसे अधिक रफ्तार जुलाई में रहती है। जून में जहां औसतन हर सप्ताह लगभग 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होती है, वहीं जुलाई में यह बढ़कर 200 से 250 लाख हेक्टेयर प्रति सप्ताह तक पहुंच जाती है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और उत्पादकता का सटीक आकलन बुआई पूरी होने के बाद ही किया जा सकेगा। सरकार बुआई के आंकड़ों की पुष्टि प्रारंभिक अनुमान, रिमोट सेंसिंग और ब्लॉक स्तर के डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से करती है।और पढ़ें :- महाराष्ट्र के केज तालुका में खरीफ बुवाई लगभग पूरी, 64 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती

Related News

Youtube Videos

आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Today 14 Oct 2026
आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Tod...
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | Cotton Market Rate Today 12 Oct 2026
कपास की कीमतों में उछाल 😱 CCI ने बढ़ाए ₹500 प्रति कैंडी | C...

Circular

title Created At Action
कमजोर मानसून से नासिक में खरीफ बुवाई प्रभावित, 45% कृषि भूमि अब भी बिना बोई 13-07-2026 12:43:12 view
कपास की खेती पर ₹14,000 से ₹27,000 तक सहायता, जानें कौन उठा सकता है योजना का लाभ 13-07-2026 12:10:47 view
पंजाब में कपास का रकबा रिकॉर्ड निचले स्तर पर, व्हाइटफ्लाई और पिंक बॉलवर्म का खतरा बढ़ा 13-07-2026 11:49:01 view
महाराष्ट्र ने खरीफ 2026 के लिए मराठवाड़ा के तीन जिलों में कपास उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य तय किया 13-07-2026 11:37:27 view
कल्याण कर्नाटक में सूखे का संकट, खरीफ फसलों की पैदावार 30% तक घटने की आशंका 13-07-2026 11:20:29 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 38 पैसे गिरकर 95.70 पर खुला. 13-07-2026 09:19:45 view
CCI ने कपास भाव ₹800 बढ़ाए 11-07-2026 15:23:57 view
गुजरात का ₹134.80 करोड़ कॉटन मिशन 11-07-2026 12:46:03 view
सेंधवा में 64% खरीफ बुवाई पूरी, मक्का के साथ कपास की खेती में किसानों की बढ़ी रुचि 11-07-2026 12:40:53 view
मनावर में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, 28 हजार हेक्टेयर में कपास और सोयाबीन की खेती 11-07-2026 12:20:38 view
बेहतर मानसून से जुलाई में तेज हुई कपास की बुवाई, फिर भी पिछले साल से पीछे 11-07-2026 12:11:38 view
Application Download
Whatsapp Contact