आँध्रप्रदेश में कपास की खेती पर संकट: बढ़ती लागत और घटती पैदावार

2024-09-28 18:14:06
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आंध्र प्रदेश का कपास कृषि संकट: घटती पैदावार और बढ़ता खर्च


लगातार चार साल से कपास की खेती से जूझ रहे किसान अब भी उम्मीद के साथ फसल बो रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और कीटों के कारण उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। 


कीटनाशक लागत में वृद्धि:  

कपड़ों पर कीटों का प्रकोप और कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग से किसानों की लागत बढ़ती जा रही है। बारिश की कमी और कीटों की मार से कपास की पैदावार कम हो गई है, जिससे किसान कर्ज में डूब गए हैं।

अव्यवस्थित खरीद केंद्र  
हालांकि कपास की चुनाई शुरू हो गई है, सरकार ने अभी तक खरीद केंद्र स्थापित नहीं किए हैं। निजी व्यापारी कपास की कीमतें घटाकर 5,500 से 6,500 रुपये प्रति क्विंटल पर ले आए हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। किसानों ने सरकार से तुरंत हस्तक्षेप कर सीसीआई खरीद केंद्र स्थापित करने की मांग की है।


कर्ज और उपज की समस्या  
कपास की खेती की लागत बढ़ रही है, जबकि प्रति एकड़ उपज की मात्रा घटकर केवल 4-5 क्विंटल रह गई है। किसानों का कहना है कि अगर कपास की कीमत नहीं बढ़ी, तो उन्हें और भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।


जाजू रोग का प्रकोप
कपास के पौधों पर जाजू रोग का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे पैदावार प्रभावित हो रही है। कपास की पत्तियाँ लाल हो रही हैं और उत्पादन में भारी गिरावट आ रही है। किसान इस संकट से चिंतित हैं और सरकार से मदद की मांग कर रहे हैं।


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