Recent News

कॉटन आयात शुल्क हटाने पर सरकार की चर्चा अंतिम चरण में

कपास आयात शुल्क हटाना: सरकार का परामर्शनई दिल्ली, (PTI) एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि सरकार कच्चे कॉटन के इंपोर्ट पर 11 परसेंट कस्टम ड्यूटी के बारे में "सलाह के एडवांस्ड स्टेज" में है, और यह देख रही है कि क्या यह लेवी हटाई जा सकती है, और जल्द ही इस पर फैसला होने की उम्मीद है।फाइनेंस, टेक्सटाइल और एग्रीकल्चर समेत कई मिनिस्ट्री इस ड्यूटी पर सोच-विचार कर रही हैं, टेक्सटाइल इंडस्ट्री ज़्यादा कीमतों के कारण घरेलू कंपनियों पर लागत का दबाव कम करने के लिए इसे हटाने की मांग कर रही है।अधिकारी ने PTI को बताया, "हम फाइनेंस और एग्रीकल्चर (दोनों मिनिस्ट्री) से बात कर रहे हैं, और यह सलाह के एडवांस्ड स्टेज में है। हमें उम्मीद है कि जल्द ही सलाह को फाइनल कर लिया जाएगा।"अपैरल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और एक्सपोर्टर्स वाले एक डेलीगेशन ने हाल ही में वाइस प्रेसिडेंट सी पी राधाकृष्णन और कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की और ड्यूटी हटाने की मांग की। डेलीगेशन ने कहा कि इस साल टेक्सटाइल इंडस्ट्री को लगभग 337 लाख बेल्स कॉटन की ज़रूरत है, जबकि 2025-26 सीज़न में कॉटन की आवक 292.15 लाख बेल्स होने का अनुमान है, जिससे सप्लाई-डिमांड में लगभग 45 लाख बेल्स का अंतर होगा।उन्होंने कहा कि यह कमी अच्छी क्वालिटी के कच्चे माल की कम उपलब्धता और बढ़ती इनपुट लागत के कारण स्पिनिंग मिलों और डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर्स पर दबाव डाल रही है।और पढ़ें :-भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 33 पैसे मजबूत होकर 95.35 पर खुला

CCI ने कपास के दाम ₹700 घटाए, साप्ताहिक नीलामी बिक्री 11,600 गांठों के पार

CCI ने कॉटन कैंडी की कीमतें ₹700 कम कीं; साप्ताहिक नीलामी बिक्री 11,600 गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 18 मई से 22 मई 2026 के सप्ताह के दौरान कॉटन की कीमतों में ₹700 प्रति कैंडी की कमी की। कीमतों में इस सुधार के बावजूद, CCI की नीलामियों में मिलों और कॉटन व्यापारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया, और 2025–26 कॉटन सीज़न से कुल साप्ताहिक बिक्री 11,600 गांठों के पार पहुंच गई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 19 मई 2026 (मंगलवार):सप्ताह की शुरुआत 9,900 गांठों की बिक्री के साथ हुई। मिलों ने 7,200 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 2,700 गांठें उठाईं।20 मई 2026 (बुधवार):CCI ने दिन के दौरान कुल 1,500 गांठों की बिक्री दर्ज की, जिसमें मिलों द्वारा खरीदी गई 1,000 गांठें और व्यापारियों द्वारा खरीदी गई 500 गांठें शामिल थीं।21 मई 2026 (गुरुवार):सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन नीलामी की गतिविधियां सीमित रहीं, जिसमें मिलों ने 200 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री अपडेट2025–26 सीज़न के लिए CCI की कुल कॉटन बिक्री अब 70,33,300 गांठों तक पहुंच गई है।

अमेरिकी कपास में 40% उछाल, 11% आयात शुल्क हटाने की मांग; निर्यात पर संकट की चेतावनी

US कॉटन में 40% तूफानी तेजी! विनय कोटक जी बोले- 11% ड्यूटी हटाओ वरना एक्सपोर्ट पर बड़ा खतराकॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेजिडेंट Vinay Kotak ने CNBC आवाज़ से खास बातचीत में कहा कि पिछले डेढ़ महीने में US ICE कॉटन फ्यूचर में लगभग 40% की तेजी देखने को मिली है। उनके अनुसार, इसकी सबसे बड़ी वजह बाजार में मौजूद करीब 1 करोड़ बेल्स की शॉर्ट पोजीशन रही। जैसे ही वैश्विक जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ा और क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग 40% उछाल आया, वैसे ही बड़े स्तर पर शॉर्ट कवरिंग शुरू हो गई, जिससे बाजार में भारी खरीदारी का दबाव बना और कॉटन फ्यूचर तेजी से ऊपर चले गए।उन्होंने बताया कि मौजूदा स्तरों पर कीमतों में कुछ रेजिस्टेंस दिखाई दे रहा है। यार्न के दाम भी पहले 30 CCH से बढ़कर करीब 325 रुपये तक पहुंच गए थे, लेकिन अब यह करीब 310 रुपये पर आ गए हैं, यानी हाल के दिनों में लगभग 4-5% की गिरावट दर्ज हुई है। उनका मानना है कि ऊंचे दामों के कारण डिमांड डिस्ट्रक्शन देखने को मिल रहा है और बाजार के लिए इन कीमतों को लंबे समय तक absorb करना आसान नहीं है।हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्तरों पर स्पिनिंग मिल्स अभी भी मुनाफे में हैं, भले ही उनके मार्जिन पहले के मुकाबले कम हुए हों। इसी वजह से उन्हें नहीं लगता कि रुई के दामों में बहुत बड़ी गिरावट आएगी।इम्पोर्ट ड्यूटी के मुद्दे पर बात करते हुए विनय कोटक ने कहा कि भारत मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में कॉटन आयात करता है, जिसमें एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल कॉटन और contamination-free कॉटन की विशेष मांग शामिल है। उनका कहना है कि यदि 11% आयात शुल्क जारी रहता है, तो भारत के टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स के लिए Bangladesh, Indonesia, China और Vietnam जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे भारत का वैश्विक निर्यात शेयर प्रभावित हो सकता है।उन्होंने कहा कि यदि यह ड्यूटी हटाई जाती है, तो देश में वैल्यू-ऐडेड टेक्सटाइल एक्सपोर्ट को बड़ा समर्थन मिलेगा। इसी को ध्यान में रखते हुए Cotton Association of India ने सरकार से अप्रैल से अक्टूबर तक 11% आयात शुल्क हटाने की मांग की है।उन्होंने स्पष्ट किया कि मार्च तक किसानों की लगभग 90% कपास बिक चुकी होती है और केवल 10% स्टॉक कुछ किसान अपने पास रखते हैं। ऐसे में ड्यूटी हटाने से किसानों को बड़ा नुकसान नहीं होगा। साथ ही किसानों को सरकार के MSP का संरक्षण भी प्राप्त है, जिसमें इस वर्ष करीब 7% की बढ़ोतरी की गई है।विनय कोटक के अनुसार, वर्तमान समय में उपभोक्ताओं और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को किसी प्रकार का संरक्षण नहीं मिल रहा है। ऐसे में अप्रैल से अक्टूबर के lean period के दौरान 11% ड्यूटी हटाना उद्योग और उपभोक्ताओं दोनों के हित में होगा। उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल मंत्रालय और Cotton Corporation of India भी इस आवश्यकता को लेकर सहमत हैं।और पढ़ें:- रुपया डॉलर के मुकाबले 60 पैसे मजबूत होकर 95.68 पर बंद

हरियाणा के किसान कपास छोड़ धान की खेती की ओर क्यों बढ़ रहे हैं

कपास से धान की ओर: हरियाणा के किसान अपना रास्ता क्यों बदल रहे हैं।2020 और 2025 के बीच, हरियाणा के फसल पैटर्न में बड़ा बदलाव आया है। चावल की खेती का रकबा 2020 में 1,525.77 हेक्टेयर से बढ़कर 2025 में 1,867.51 हेक्टेयर हो गया, जबकि कपास का रकबा 719.86 हेक्टेयर से घटकर सिर्फ़ 401.05 हेक्टेयर रह गया। यह बदलाव किसानों की धान के लिए बढ़ती पसंद को दिखाता है, जिससे पक्की खरीद और स्थिर रिटर्न मिलता है। इसके उलट, कीड़ों के हमलों, Bt-कॉटन की घटती रेज़िस्टेंस और खेती में बढ़ते नुकसान के कारण कपास तेज़ी से फ़ायदेमंद नहीं रहा है।धान सबसे पहली पसंद क्यों है?किसान धान चुनने का मुख्य कारण मुनाफ़ा बताते हैं। किसानों के संगठन पगड़ी संभाल जट्टा किसान संघर्ष समिति के प्रेसिडेंट मंदीप नाथवान के मुताबिक, धान से हर एकड़ करीब 80,000 रुपये की इनकम हो सकती है, जिसमें खर्च निकालने के बाद भी करीब 50,000 रुपये का प्रॉफिट होता है।कुरुक्षेत्र के किसान एक्टिविस्ट राकेश बैंस भी यही बात कहते हैं, उनका कहना है कि दूसरी फसलों से हर एकड़ सिर्फ 50,000 रुपये ही मिलते हैं, जबकि धान से 80,000 रुपये मिलते हैं, जिससे चावल ज़्यादा अच्छा ऑप्शन बन गया है।हरियाणा के किसानों ने कौन सी फसलें छोड़ी हैं?इंडियन काउंसिल ऑफ़ एग्रीकल्चरल रिसर्च (ICAR) के पुराने साइंटिस्ट वीरेंद्र लाठेर बताते हैं कि हाल के सालों में किसानों ने कपास, मक्का, ज्वार, दालें और तिलहन छोड़कर धान की खेती शुरू कर दी है, जिसमें कपास की खेती सबसे ज़्यादा कम हुई है।BT-कॉटन, जो कभी पिंक बॉलवर्म जैसे कीड़ों के लिए रेज़िस्टेंट था, अब अपना असर खो चुका है क्योंकि कीड़ों ने समय के साथ खुद को ढाल लिया है। किसान अब पेस्टिसाइड पर बहुत ज़्यादा खर्च करते हैं, लेकिन फिर भी उन्हें प्रति एकड़ सिर्फ़ दो क्विंटल पैदावार मिलती है, जो मुनाफ़े के लिए ज़रूरी आठ क्विंटल से बहुत कम है। इससे उन्हें प्रति एकड़ लगभग 15,000 रुपये का नुकसान होता है।सरकार ने फ़सलों में अलग-अलग तरह के बदलाव को बढ़ावा देने के लिए क्या किया है?ज़्यादा पानी वाली धान की खेती करने वाले किसानों के खतरों को समझते हुए, हरियाणा सरकार ने अलग-अलग तरह के बदलाव को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं। ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ स्कीम के तहत, किसानों को दालें, कपास और मक्का जैसी कम पानी वाली फ़सलें उगाने के लिए प्रति एकड़ 8,000 रुपये मिलते हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में घोषणा की कि इस स्कीम के तहत 2.20 लाख एकड़ में 157 करोड़ रुपये बांटे गए हैं। एक्स्ट्रा फ़ायदों में माइक्रो-इरिगेशन टेक्नोलॉजी, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और तालाब बनाने के लिए 85 परसेंट तक की सब्सिडी शामिल है।एक्सपर्ट्स और किसान क्या सुझाव देते हैं? चावल की खेती में सस्टेनेबल तरीकों को बढ़ावा देने के लिए, सरकार डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) अपनाने पर हर एकड़ 4,000 रुपये देती है, जिसमें पारंपरिक रोपाई के मुकाबले कम पानी लगता है। हालांकि, वीरेंद्र लाठेर जैसे एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसानों का व्यवहार बदलने के लिए यह इंसेंटिव बहुत कम है और वे हरियाणा के गिरते वॉटर लेवल को ठीक करने के लिए पारंपरिक धान की खेती पर रोक लगाने का भी सुझाव देते हैं। वहीं, किसान इस बात पर ज़ोर देते हैं कि अगर डायवर्सिफिकेशन को सफल बनाना है तो दूसरी फसलों के लिए बेहतर मार्केटिंग और खरीद की सुविधाएं ज़रूरी हैं।और पढ़ें :- भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 96.28 पर खुला

राजस्थान में भाखड़ा नहर से सिंचाई जल आपूर्ति शुरू, कपास और नरमा की बुवाई को मिलेगा बढ़ावा

राजस्थान: भाखड़ा नहर प्रणाली से आज से सिंचाई पानी, कपास-नरमा की बुवाई को मिलेगी रफ्तारहनुमानगढ़ जिले के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। भाखड़ा नहर प्रणाली से गुरुवार से सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति शुरू हो गई है। जल संसाधन विभाग ने भाखड़ा प्रणाली का नया रोटेशन जारी करते हुए 21 से 29 मई तक का साप्ताहिक वरीयताक्रम घोषित किया है। इसके तहत 1200 क्यूसेक क्षमता वाली नहरों को पूरी क्षमता से चलाया जाएगा, जबकि छोटी नहरों में तय क्षमता के अनुसार पानी छोड़ा जाएगा।विभाग के अनुसार रतनपुरा नहर में 42 क्यूसेक, नाथवाना में 73, प्रतापपुरा में 248, हरिपुरा में 261, दीनगढ़ में 274 और सूरतपुरा में 283 क्यूसेक पानी प्रवाहित किया जाएगा। वहीं मोडिया, लोंगवाला, पीलीबंगा, अमरपुरा और रोड़ांवाली जैसी प्रमुख नहरों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी छोड़ा जाएगा। सबसे अधिक 2222 क्यूसेक पानी संगरिया नहर में प्रवाहित होगा।अधिकारियों ने बताया कि प्रत्येक नहर को आठ दिन तक पूरी क्षमता से चलाने के बाद बंद किया जाएगा। यदि पानी के स्तर में बदलाव होता है तो संबंधित अधिकारियों से चर्चा के बाद रेगुलेशन में आवश्यक परिवर्तन किए जाएंगे।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय नरमा और कपास की बुवाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ दिनों से भीषण गर्मी और पानी की कमी के कारण किसानों को खेत तैयार करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। अब नहरों में पानी आने से बुवाई कार्य में तेजी आने की उम्मीद है।किसानों ने उम्मीद जताई है कि यदि आने वाले दिनों में पानी की आपूर्ति नियमित बनी रही तो कपास, नरमा और अन्य खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर होगा। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ने से लोगों को गर्मी से भी राहत मिलेगी।और पढ़ें:- भारत को टेक्सटाइल कचरे का ‘डंपिंग ग्राउंड’ बताना भ्रामक: केंद्र सरकार

भारत को टेक्सटाइल कचरे का ‘डंपिंग ग्राउंड’ बताना भ्रामक: केंद्र सरकार

भारत को टेक्सटाइल कचरे का डंपिंग ग्राउंड बताना भ्रामक: केंद्र सरकारनई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारत के टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम का बचाव करते हुए कहा है कि देश को टेक्सटाइल कचरे का “डंपिंग ग्राउंड” बताना भ्रामक और तथ्यों से परे है। टेक्सटाइल मंत्रालय ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े टेक्सटाइल रिकवरी और रीसाइक्लिंग नेटवर्क में शामिल है, जिसे लंबे समय से चले आ रहे पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण तंत्र का समर्थन प्राप्त है।मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में कुछ अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में पानीपत जैसे टेक्सटाइल क्लस्टरों को केंद्र में रखकर पर्यावरण और श्रमिक सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जबकि सेक्टर में सस्टेनेबिलिटी, नियामकीय सुधार और नई तकनीकों के उपयोग की दिशा में हुई प्रगति को नजरअंदाज किया गया।सरकार ने स्पष्ट कहा कि भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को पर्यावरण के प्रति लापरवाह या संरचनात्मक रूप से शोषणकारी बताना गलत है और इससे इस क्षेत्र में जारी सुधारात्मक प्रयासों और सस्टेनेबिलिटी आधारित पहलों की अनदेखी होती है।मंत्रालय के अनुसार, भारत में हर वर्ष लगभग 7,073 किलो टन टेक्सटाइल कचरा उत्पन्न होता है। “मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया 2026” अध्ययन का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि विनिर्माण प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले प्री-कंज्यूमर टेक्सटाइल वेस्ट का करीब 97 प्रतिशत हिस्सा पुनर्चक्रित किया जाता है।सरकार ने उन दावों को भी खारिज किया कि भारत पश्चिमी देशों के फास्ट फैशन कचरे का प्रमुख ठिकाना बन रहा है। मंत्रालय के अनुसार, देश में प्रबंधित किए जाने वाले लगभग 7.8 मिलियन टन टेक्सटाइल कचरे में 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा घरेलू स्तर पर उत्पन्न होता है, जबकि आयातित कचरे की हिस्सेदारी केवल लगभग 7 प्रतिशत है।फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल वेस्ट इकोसिस्टम से देश में प्रतिवर्ष लगभग 22,000 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधि उत्पन्न होती है।सरकार ने आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं के अध्ययन का भी उल्लेख किया, जिसमें पानीपत क्लस्टर के आंकड़ों के आधार पर पाया गया कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग से वर्जिन फाइबर उत्पादन की तुलना में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और जीवाश्म ईंधन उपयोग जैसे पर्यावरणीय प्रभावों में लगभग 40 प्रतिशत तक कमी आती है।हालांकि सरकार ने यह स्वीकार किया कि पोस्ट-कंज्यूमर वेस्ट मैनेजमेंट, असंगठित इकाइयों और श्रमिक सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं, लेकिन उद्योग लगातार अधिक औपचारिक व्यवस्था, स्वच्छ तकनीक और बेहतर पर्यावरणीय अनुपालन की दिशा में आगे बढ़ रहा है।मंत्रालय ने कहा कि टेक्सटाइल रीसाइक्लिंग इकाइयां मौजूदा पर्यावरण और श्रम कानूनों के तहत संचालित होती हैं तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) सहित विभिन्न नियामक एजेंसियां नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।और पढ़ें:- रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 96.20 पर बंद हुआ।

भारत टेक्स 2026 के लिए टेक्सटाइल मंत्रालय ने लॉन्च किया AI आधारित स्मार्ट ऐप

कपड़ा मंत्रालय ने Bharat Tex 2026 के लिए AI-संचालित स्मार्ट ऐप लॉन्च कियाकपड़ा मंत्रालय ने Ministry of Textiles के तहत आयोजित होने वाले वैश्विक टेक्सटाइल इवेंट Bharat Tex 2026 के लिए एक AI-संचालित स्मार्ट इवेंट ऐप लॉन्च किया है। इस ऐप का उद्देश्य पूरे आयोजन को अधिक डिजिटल, इंटरैक्टिव और व्यवसायिक रूप से प्रभावी बनाना है, ताकि प्रदर्शकों, खरीदारों, प्रतिनिधियों, सोर्सिंग विशेषज्ञों, वक्ताओं और आगंतुकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।इस प्लेटफ़ॉर्म की सबसे प्रमुख विशेषता इसका AI-आधारित स्मार्ट असिस्टेंट है, जो 24×7 संवादात्मक सहायता प्रदान करता है। उपयोगकर्ता सरल भाषा में प्रश्न पूछकर कार्यक्रम की समय-सारणी, स्थल की जानकारी, दिशा-निर्देश, सेवाओं और अन्य आवश्यक विवरण तुरंत प्राप्त कर सकते हैं। इससे प्रतिभागियों को इवेंट के दौरान जानकारी खोजने में समय नहीं गंवाना पड़ता और उनका अनुभव अधिक सहज बनता है।ऐप में एक मजबूत बिज़नेस नेटवर्किंग सिस्टम भी शामिल किया गया है, जो प्रदर्शकों और खरीदारों को संभावित व्यावसायिक साझेदारों की पहचान करने, बैठकें तय करने और अपनी उपलब्धता को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की सुविधा देता है। सभी मीटिंग्स और इंटरैक्शन को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा सकता है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है।प्रदर्शकों के लिए ‘लीड वॉलेट’ और QR-आधारित लीड कैप्चर सिस्टम भी उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वे विज़िटर के डिजिटल बैज स्कैन करके संपर्क जानकारी सुरक्षित रूप से संग्रहित कर सकते हैं। इससे इवेंट के बाद फॉलो-अप प्रक्रिया सरल और अधिक प्रभावी हो जाती है।इसके अतिरिक्त, ऐप में इंटरैक्टिव फ्लोर प्लान, बूथ लोकेशन सर्च और स्टॉल-स्तरीय नेविगेशन जैसी सुविधाएँ भी दी गई हैं। अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए ‘Exhibitor Discovery Module’ उपलब्ध है, जिससे वे कंपनियों को श्रेणी, नाम और उत्पाद प्रकार के आधार पर खोज सकते हैं। रियल-टाइम अपडेट, व्यक्तिगत शेड्यूल और अलर्ट सिस्टम इस प्लेटफ़ॉर्म को और भी उन्नत बनाते हैं, जिससे Bharat Tex 2026 एक स्मार्ट और वैश्विक व्यापार मंच के रूप में उभरता है।और पढ़ें:- कपास की समय पर बुवाई से किसानों को होगा अधिक लाभ, वैज्ञानिकों की सलाह

Related News

Youtube Videos

जानिए आज कपास बाज़ार में क्या हुआ? 😱 नए सीजन ताज़ा अपडेट | Cotton Market Rate 15 Oct 2026
जानिए आज कपास बाज़ार में क्या हुआ? 😱 नए सीजन ताज़ा अपडेट |...
आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Today 14 Oct 2026
आज देशभर में रुई के भाव क्या रहे? 😱 Cotton Market Price Tod...
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #cotton
Cotton Rate Today 😱 | आज के कपास के भाव | 13 October 2026 #...

Circular

title Created At Action
कॉटन आयात शुल्क हटाने पर सरकार की चर्चा अंतिम चरण में 25-05-2026 12:09:21 view
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 33 पैसे मजबूत होकर 95.35 पर खुला 25-05-2026 09:20:48 view
CCI ने कपास के दाम ₹700 घटाए, साप्ताहिक नीलामी बिक्री 11,600 गांठों के पार 23-05-2026 12:13:18 view
अमेरिकी कपास में 40% उछाल, 11% आयात शुल्क हटाने की मांग; निर्यात पर संकट की चेतावनी 23-05-2026 12:04:21 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 60 पैसे मजबूत होकर 95.68 पर बंद 22-05-2026 16:11:19 view
हरियाणा के किसान कपास छोड़ धान की खेती की ओर क्यों बढ़ रहे हैं 22-05-2026 12:03:03 view
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 96.28 पर खुला 22-05-2026 09:39:24 view
राजस्थान में भाखड़ा नहर से सिंचाई जल आपूर्ति शुरू, कपास और नरमा की बुवाई को मिलेगा बढ़ावा 21-05-2026 17:09:15 view
भारत को टेक्सटाइल कचरे का ‘डंपिंग ग्राउंड’ बताना भ्रामक: केंद्र सरकार 21-05-2026 16:58:36 view
रुपया डॉलर के मुकाबले 10 पैसे की बढ़त के साथ 96.20 पर बंद हुआ। 21-05-2026 15:56:06 view
भारत टेक्स 2026 के लिए टेक्सटाइल मंत्रालय ने लॉन्च किया AI आधारित स्मार्ट ऐप 21-05-2026 13:21:50 view
Application Download
Whatsapp Contact