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तिरुपूर गारमेंट इंडस्ट्री ने केंद्र से कपास पर आयात शुल्क हटाने की अपील की।

तिरुपूर के गारमेंट एक्सपोर्टर्स और मैन्युफैक्चरर्स ने कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग कीतिरुपूर के गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स और एक्सपोर्टर्स के एक डेलिगेशन ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कपड़ा, कृषि और वाणिज्य मंत्रियों से मुलाकात की और कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी हटाने की मांग की, जो अभी 11% है।अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन ए. शक्तिवेल ने इस डेलिगेशन का नेतृत्व किया। इस डेलिगेशन ने केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान, और केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह, के साथ-साथ केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री एल. मुरुगन से मुलाकात की।डेलिगेशन ने कपास की ऊंची कीमतों और बढ़ती इनपुट लागतों के कारण अपैरल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को हो रही चुनौतियों पर प्रकाश डाला। भारत ने हाल ही में कई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) किए हैं, जिससे टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी के लिए महत्वपूर्ण अवसर पैदा हुए हैं। हालांकि, अपैरल एक्सपोर्ट करने वाले दूसरे देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी कीमतों पर कपास हासिल कर पा रहे हैं, जबकि भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को मौजूदा इंपोर्ट ड्यूटी ढांचे के कारण कच्चे माल की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।भारतीय अपैरल इंडस्ट्री को FTA साझेदार देशों से व्यापार के अधिक अवसर हासिल करने और वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में मदद करने के लिए कपास पर इंपोर्ट ड्यूटी में कमी करना जरूरी है।चालू वर्ष के लिए टेक्सटाइल इंडस्ट्री की कपास की जरूरत लगभग 337 लाख गांठ होने का अनुमान है, जबकि 2025-2026 सीजन के लिए कपास की आवक केवल 292.15 लाख गांठ होने का अनुमान है, जिसके परिणामस्वरूप मांग और आपूर्ति में लगभग 45 लाख गांठ का अंतर आ रहा है। डेलिगेशन ने मंत्रियों को बताया कि इस कमी से बढ़ती इनपुट लागतों और गुणवत्ता वाले कच्चे माल की सीमित उपलब्धता के कारण स्पिनिंग मिलों और डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल इंडस्ट्री पर दबाव बढ़ने की उम्मीद है।और पढ़ें :- रुपया 02 पैसे की गिरकर के साथ 95.73 पर खुला

कपास उत्पादकता मिशन: सही क्रियान्वयन, बेहतर परिणाम

कपास उत्पादकता मिशन: सफलता की कुंजी प्रभावी क्रियान्वयन मेंभारत का 5,659 करोड़ रुपये का कपास उत्पादकता मिशन ऐसे समय में शुरू किया गया है जब देश की कपास अर्थव्यवस्था गंभीर कृषि और औद्योगिक चुनौतियों से जूझ रही है। लगातार घटती पैदावार, बढ़ते कीट प्रकोप और सिकुड़ते रकबे ने उस फसल को कमजोर कर दिया है जो कभी ग्रामीण आय और भारत के वस्त्र उद्योग की रीढ़ मानी जाती थी। ऐसे में केंद्र की यह पहल केवल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि उन किसानों का भरोसा लौटाने का प्रयास भी है जिन्होंने धीरे-धीरे कपास की खेती से दूरी बना ली है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों के लिए यह मिशन विशेष महत्व रखता है।पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास कभी एक विश्वसनीय नकदी फसल हुआ करती थी। लेकिन सफेद मक्खी और गुलाबी बॉलवर्म के बार-बार हमले, मौसम की अनिश्चितता और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों को फिर से धान की ओर मोड़ दिया, जबकि धान की खेती पहले से ही भूजल संकट को और गहरा कर रही है। उत्तर भारत में कपास के घटते रकबे से यह साफ झलकता है कि किसान आज पर्यावरणीय अस्थिरता और आर्थिक असुरक्षा के बीच संघर्ष कर रहे हैं।मिशन में जलवायु-अनुकूल बीज किस्मों, उच्च घनत्व रोपण तकनीकों, आधुनिक जिनिंग ढांचे और अतिरिक्त लंबे रेशे वाले कपास पर दिया गया जोर निश्चित रूप से सकारात्मक कदम है। भारत यदि वैश्विक कपड़ा उद्योग में अग्रणी बनना चाहता है, तो उसे प्रीमियम गुणवत्ता वाले आयातित कपास पर निर्भरता कम करनी होगी। ‘खेत से फाइबर, फैशन और विदेशी बाजार तक’ की व्यापक रणनीति इस तथ्य को स्वीकार करती है कि कृषि और विनिर्माण एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं।हालांकि, इस मिशन की वास्तविक सफलता इसकी जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन क्षमता पर निर्भर करेगी। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज, सस्ता ऋण, वैज्ञानिक कीट प्रबंधन और ऐसी फसल बीमा व्यवस्था चाहिए जो कागजी औपचारिकताओं में उलझने के बजाय वास्तविक सुरक्षा दे सके। यदि किसानों को फिर से कपास की खेती की ओर आकर्षित करना है, तो खरीद व्यवस्था में भरोसा बहाल करना भी उतना ही जरूरी होगा।पंजाब और हरियाणा जैसे जल संकट से जूझ रहे राज्यों में कपास की वापसी धान पर निर्भरता कम करने और भूजल संरक्षण में मददगार साबित हो सकती है। लेकिन यदि यह मिशन भी कागजी योजनाओं और धीमे समन्वय तक सीमित रह गया, तो देश एक बार फिर उसी निराशा के चक्र में फंस जाएगा जिसने किसानों को कपास की खेती छोड़ने पर मजबूर किया था।और पढ़ें :- तमिलनाडु: नागपट्टिनम ज़िले में लगातार बारिश से किसान चिंतित

तमिलनाडु: नागपट्टिनम ज़िले में लगातार बारिश से किसान चिंतित

नागापट्टिनम ज़िला, तमिलनाडु में लगातार बारिश से कपास किसानों की बढ़ी चिंतानागापट्टिनम ज़िला, तमिलनाडु में पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही गर्मियों की बारिश ने थिरुमारुगल ब्लॉक के कई इलाकों में कपास की खेती को प्रभावित किया है। खेतों में बारिश का पानी भर जाने से किसानों को फ़सल खराब होने की आशंका सताने लगी है।रिपोर्ट के मुताबिक, आधी रात से थिरुमारुगल, अलाथुर, एरावंचेरी, मरुंगुर, नेइकुप्पई, थिरुकन्नपुरम, अंबल, पोलगम और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है। ज़िले के कई हिस्सों में पिछले तीन दिनों से तेज़ गर्मियों की बारिश दर्ज की गई है।थिरुमारुगल ब्लॉक में किसानों ने बड़े पैमाने पर गर्मियों की फ़सल के रूप में कपास की बुवाई की थी। इस समय फसल में फूल आने और डोडे बनने का चरण चल रहा है। हालांकि, कई किसान अभी तक खेतों में मिट्टी चढ़ाने का काम पूरा नहीं कर पाए हैं। लगातार बारिश के चलते कई खेतों में पानी जमा हो गया है, जिससे कपास के पौधों की बढ़वार प्रभावित हो रही है।कपास किसान आर. शिवा ने बताया, “बारिश के कारण कपास के पौधों पर लगे फूल झड़ रहे हैं, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।”एक अन्य किसान पी. कथिर ने कहा कि यदि खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहा तो पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं, जिससे किसानों को गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि बारिश इसी तरह जारी रही तो नुकसान और बढ़ सकता है।और पढ़ें :- CCI ने कॉटन कैंडी कीमत ₹4,100 बढ़ाई, नीलामी 5.85 लाख गांठ पार

CCI ने कॉटन कैंडी कीमत ₹4,100 बढ़ाई, नीलामी 5.85 लाख गांठ पार

CCI ने कॉटन कैंडी की कीमतें ₹4,100 प्रति कैंडी बढ़ाईं; साप्ताहिक नीलामी बिक्री 5.85 लाख गांठों के पारकॉटन कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (CCI) ने 4 मई से 8 मई, 2026 के सप्ताह के दौरान कॉटन की कीमतों में ₹4,100 प्रति कैंडी की बढ़ोतरी की। इन नीलामियों में मिलों और कॉटन व्यापारियों की ज़ोरदार भागीदारी देखने को मिली, जिसके परिणामस्वरूप 2025–26 सीज़न के स्टॉक से लगभग 5,85,500 गांठों की साप्ताहिक बिक्री हुई।साप्ताहिक बिक्री रिपोर्ट 4 मई, 2026 (सोमवार):सप्ताह की शुरुआत मज़बूत रही, जिसमें एक ही दिन में सबसे ज़्यादा 2,36,400 गांठों की बिक्री दर्ज की गई। मिलों ने 89,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 1,46,800 गांठें खरीदकर खरीदारी में बढ़त बनाई।5 मई, 2026 (मंगलवार):नीलामी की गतिविधियाँ थोड़ी धीमी पड़ गईं, और कुल बिक्री 159,900 गांठों तक पहुँची। मिलों ने 70,600 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 89,300 गांठें खरीदीं।6 मई, 2026 (बुधवार):CCI ने इस दिन कुल 121,900 गांठों की बिक्री की जानकारी दी। मिलों ने 55,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 66,600 गांठें खरीदीं।7 मई, 2026 (गुरुवार):बिक्री की मात्रा में और गिरावट आई, और इस सत्र के दौरान 40,300 गांठें बिकीं। मिलों ने 22,300 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारियों ने 18,000 गांठें खरीदीं। 8 मई, 2026 (शुक्रवार):सप्ताह का समापन कुल 27,000 गांठों की बिक्री के साथ हुआ। मिलों ने 12,000 गांठें खरीदीं, जबकि व्यापारी सक्रिय रहे और उन्होंने कुल 15,000 गांठें खरीदीं।कुल बिक्री की जानकारीCCI की कुल बिक्री अब यहाँ तक पहुँच गई है:2025–26 सीज़न: 65,98,000 गांठें

Bt कपास बीज बिक्री पर सरकार सख्त, बुवाई से पहले इंतजार जरूरी..!

कपास किसानों के लिए अहम अपडेट: Bt बीजों की बिक्री और बुवाई पर सरकार सख्त, अभी करना होगा इंतज़ार..!जलगांव: आगामी खरीफ सीजन 2026 को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने कपास फसल में गुलाबी इल्ली (Pink Bollworm) के बढ़ते खतरे को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। राज्य के कृषि, पशुपालन, डेयरी विकास एवं मत्स्य पालन विभाग ने Bt कपास बीजों की बिक्री, आपूर्ति और बुवाई को लेकर नई समय-सारिणी लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।8 मई 2026 को जारी सरकारी परिपत्र के अनुसार, राज्य की सभी कृषि एजेंसियों और अधिकारियों को इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। मंत्रालय द्वारा पुणे स्थित कृषि आयुक्त कार्यालय को भेजे गए निर्देशों में साफ कहा गया है कि समय से पहले कपास की बुवाई गुलाबी इल्ली के प्रकोप को बढ़ावा देती है, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ता है।सरकार का मानना है कि जल्द बुवाई से कीटों के जीवन चक्र को अनुकूल वातावरण मिलता है, जिसके कारण फसल को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। पिछले कुछ वर्षों में जलगांव समेत राज्य के कई प्रमुख कपास उत्पादक जिलों में गुलाबी इल्ली से किसानों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ था। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार सरकार ने पहले से ही सतर्कता बढ़ा दी है।सरकारी आदेश में किसानों से अपील की गई है कि वे केवल कृषि विभाग की अनुशंसित अवधि में ही कपास की बुवाई करें। साथ ही जिला और तालुका स्तर के कृषि अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को प्रमाणित और अधिकृत Bt बीजों के उपयोग की जानकारी दी जा सके।इसके अलावा प्रशासन को अवैध और अनधिकृत बीजों की बिक्री पर नजर रखने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।और पढ़ें :- रुपया 40 पैसे की गिरावट के साथ 94.88 पर खुला

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