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महाराष्ट्र को टेक्सटाइल PLI योजना के तहत 24 कंपनियों से ₹167.51 करोड़ का निवेश मिला

महाराष्ट्र में टेक्सटाइल PLI स्कीम के तहत 24 कंपनियों से ₹167.51 करोड़ का निवेश आयाटेक्सटाइल मिनिस्ट्री के अनुसार, MMF कपड़ों, MMF फैब्रिक और टेक्निकल टेक्सटाइल के प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू की गई टेक्सटाइल के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के तहत, 31 मार्च तक महाराष्ट्र में 24 मंज़ूरशुदा कंपनियों से 167.51 करोड़ रुपये (17.49 मिलियन) का निवेश आया है।पूरे देश में इस स्कीम के तहत 170 कंपनियों को मंज़ूरी दी गई है, जिनमें से 24 कंपनियां महाराष्ट्र की हैं।मिनिस्ट्री ने कहा कि वह स्कीम को लागू करने में आने वाली चुनौतियों को दूर करने और स्टेकहोल्डर्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए समय-समय पर समीक्षा, साप्ताहिक ओपन-हाउस सेशन, मासिक वर्कशॉप और आउटरीच प्रोग्राम के ज़रिए स्कीम के कार्यान्वयन पर लगातार नज़र रखती है।मिनिस्ट्री ने यह भी बताया कि अक्टूबर 2025 में स्कीम में किए गए बदलावों से निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इन बदलावों में MMF कपड़ों और फैब्रिक के तहत 17 नए HSN कोड को शामिल करना, न्यूनतम निवेश की सीमा में 50% की कमी, फ़ायदा उठाने के लिए नई कंपनी बनाने की शर्त में ढील देना और इंसेंटिव के लिए इंक्रीमेंटल टर्नओवर की ज़रूरत को 25% से घटाकर 10% करना शामिल है।और पढ़ें :- आंध्र प्रदेश में कपास की बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज रही प्रगति; कुरनूल सबसे आगे

आंध्र प्रदेश में कपास की बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज रही प्रगति; कुरनूल सबसे आगे

आंध्र प्रदेश में कपास बुवाई 13% बढ़ी, सामान्य से तेज़ प्रगति; कुरनूल सबसे आगेआंध्र प्रदेश में खरीफ 2026 के दौरान कपास की बुवाई ने पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। राज्य कृषि विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार 29 जुलाई 2026 तक राज्य में 3,36,354 हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 2,97,848 हेक्टेयर था। इस प्रकार इस वर्ष 38,506 हेक्टेयर (लगभग 13%) अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई दर्ज की गई है।राज्य में अब तक सामान्य सीजनल क्षेत्र का 65% हिस्सा बोया जा चुका है, जबकि पिछले वर्ष यह 56% था। वहीं, सामान्य तिथि के अनुसार बुवाई की प्रगति 125% रही, जो पिछले वर्ष के 101% से काफी बेहतर है। इससे स्पष्ट है कि इस वर्ष अधिकांश क्षेत्रों में बुवाई सामान्य से तेज गति से हुई है।जिलावार आंकड़ों में कुरनूल सबसे आगे रहा, जहां 2,19,767 हेक्टेयर में कपास की बुवाई दर्ज की गई। इसके बाद पलनाडु (34,489 हेक्टेयर), NTR (21,671 हेक्टेयर), अनंतपुरम (20,915 हेक्टेयर) और YSR कडप्पा (6,105 हेक्टेयर) प्रमुख रहे। वहीं प्रकाशम, बापटला, काकीनाडा, गुंटूर और श्री सत्यसाई जैसे जिलों में बुवाई सामान्य गति से पीछे रही।कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बुवाई क्षेत्र में हुई यह वृद्धि आगामी सीजन में बेहतर कपास उत्पादन का आधार बन सकती है। हालांकि अंतिम उत्पादन अगस्त–सितंबर के मौसम, वर्षा के वितरण तथा फसल की स्थिति पर निर्भर करेगा।बाजार पर संभावित प्रभाव:बढ़ी हुई बुवाई किसानों के लिए सकारात्मक संकेत है। यदि मौसम अनुकूल बना रहता है, तो आगामी सीजन में कपास की उपलब्धता बेहतर रह सकती है। इससे जिनर्स, व्यापारियों और स्पिनिंग मिलों को नई फसल की बेहतर आपूर्ति मिलने की संभावना बढ़ेगी। फिलहाल बाजार की नजर मौसम और फसल की बढ़वार पर बनी रहेगी।और पढ़ें :- मानसून से तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, कपास की बुवाई लगभग पूरी

मानसून से तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ बुवाई तेज, कपास की बुवाई लगभग पूरी

तेलंगाना और महाराष्ट्र में मॉनसून से खरीफ बुआई को रफ्तार, कपास की बुआई में तेज प्रगतिनई दिल्ली: हालिया मॉनसून बारिश ने तेलंगाना और महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की बुआई को नई गति दी है। लंबे शुष्क दौर के बाद हुई लगातार बारिश से खेतों में नमी बढ़ी है, जलाशय और खेतों के तालाब भर गए हैं, जिससे किसानों ने बुआई और धान की रोपाई का काम तेज कर दिया है। दोनों राज्यों में खरीफ फसलों की प्रगति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है, जबकि कपास की बुआई अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।तेलंगाना में 48 घंटे से अधिक समय तक हुई लगातार बूंदाबांदी के बाद अब तक 82.65 लाख एकड़ क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई हो चुकी है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 82.15 लाख एकड़ से अधिक है। कृषि अधिकारियों के अनुसार, हालिया वर्षा से मिट्टी में पर्याप्त नमी आई है और सिंचाई जल की उपलब्धता बेहतर होने से धान की रोपाई में तेजी आई है। एक सप्ताह पहले जहां राज्य में वर्षा की कमी 30 प्रतिशत थी, वहीं अब यह घटकर 19 प्रतिशत रह गई है।फसलवार प्रगति के अनुसार, धान की रोपाई 25.46 लाख एकड़ क्षेत्र में की जा चुकी है, जो 65.97 लाख एकड़ के लक्ष्य का लगभग 31 प्रतिशत है। कपास की बुआई 47.41 लाख एकड़ के लक्ष्य के मुकाबले 46.33 लाख एकड़ क्षेत्र तक पहुंच चुकी है, यानी लगभग 98 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। इसके अलावा मक्का की बुआई 4.69 लाख एकड़, अरहर 4.42 लाख एकड़ और सोयाबीन 3.66 लाख एकड़ क्षेत्र में हो चुकी है।महाराष्ट्र में भी पिछले दो सप्ताह के दौरान हुई अच्छी मॉनसून बारिश से खरीफ बुआई में तेजी आई है। राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, 30 जुलाई तक गन्ने को छोड़कर राज्य के औसत खरीफ रकबे 1.44 करोड़ हेक्टेयर में से लगभग 1.23 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई हो चुकी है, जो कुल लक्ष्य का 86 प्रतिशत है। 16 से 30 जुलाई के बीच करीब 23 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में बुआई दर्ज की गई।फसलवार आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में सोयाबीन की बुआई 47.21 लाख हेक्टेयर तथा कपास की बुआई 37.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हो चुकी है, जो अनुमानित लक्ष्य का लगभग 88 प्रतिशत है। वहीं धान की रोपाई 7.82 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की जा चुकी है। राज्य में 1 जून से 27 जुलाई के बीच 466.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य वर्षा का 94.15 प्रतिशत है।कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया वर्षा ने दोनों राज्यों में खरीफ फसलों की स्थिति में सुधार किया है। यदि आगामी सप्ताहों में मॉनसून सामान्य बना रहता है, तो कपास, धान, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर होगी तथा इस वर्ष उत्पादन की संभावनाएं और मजबूत होंगी।और पढ़ें :-वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्त्र एवं परिधान निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पार, सरकार ने बढ़ाया निर्यात प्रोत्साहन

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्त्र एवं परिधान निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पार, सरकार ने बढ़ाया निर्यात प्रोत्साहन

2025-26 में भारत का टेक्सटाइल एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात ₹3.25 लाख करोड़ के पारनई दिल्ली। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का टेक्सटाइल एवं परिधान (हस्तशिल्प सहित) निर्यात ₹3,25,339 करोड़ रहा, जो 2024-25 के ₹3,19,573.2 करोड़ की तुलना में 1.8 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में 100 से अधिक देशों को होने वाले निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई। सरकार का कहना है कि यह वृद्धि भारतीय टेक्सटाइल क्षेत्र की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और निर्यात क्षमता का संकेत है।सरकार ने टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कई योजनाएँ लागू की हैं। इनमें प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल (PM MITRA) पार्क योजना, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना, नेशनल टेक्निकल टेक्सटाइल्स मिशन, SAMARTH योजना तथा एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत मार्केट एक्सेस सपोर्ट और ब्याज सब्सिडी जैसे उपाय शामिल हैं।हाल के महीनों में सरकार ने कई नई पहलें भी की हैं। इनमें 'निर्यातित उत्पादों पर शुल्क एवं करों की छूट' (RoDTEP) योजना को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ाना, कपास और मैन-मेड फाइबर (MMF) वैल्यू चेन के प्रमुख कच्चे माल पर अस्थायी सीमा शुल्क राहत, MMF क्षेत्र में इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर को दूर करने के लिए GST दरों का युक्तिकरण तथा पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक परिस्थितियों से प्रभावित निर्यातकों की सहायता के लिए 'रेसिलिएंस एंड लॉजिस्टिक्स इंटरवेंशन फॉर एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन' (RELIEF) पहल शामिल हैं।मार्च 2019 से संचालित RoSCTL योजना की अवधि भी 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जिससे गारमेंट्स और मेड-अप्स के निर्यातकों को राज्य एवं केंद्रीय करों और लेवी की प्रतिपूर्ति का लाभ मिलता रहेगा। इसके साथ ही सरकार ने 40 प्राथमिकता वाले देशों पर केंद्रित निर्यात संवर्धन रणनीति अपनाई है। वर्तमान में भारत के 16 मुक्त व्यापार समझौते (FTA) लागू हैं, जबकि यूरोपीय संघ और न्यूजीलैंड के साथ हुए हालिया व्यापार समझौतों से भी भारतीय टेक्सटाइल उद्योग को नए बाजारों में अवसर मिलने की उम्मीद है।टेक्सटाइल मंत्रालय ने छह टेक्सटाइल एक्सपोर्ट फैसिलिटेशन सेंटर (TEFC) स्थापित किए हैं और NIFT के माध्यम से 'इंडिया इमर्सिव एक्सपीरियंस प्रोग्राम' शुरू किया है। वर्ष 2025-26 में देश के 500 से अधिक जिलों से टेक्सटाइल और हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात हुआ। सरकार का कहना है कि इन पहलों से निर्यात बाजारों में विविधता, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, ई-कॉमर्स के माध्यम से बाजार तक पहुंच और विशेष रूप से MSMEs की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला है।और पढ़ें :- डॉलर के मुकाबले रुपया 29 पैसे मजबूत होकर 95.39 पर खुला.

महाराष्ट्र के परांडा में कम बारिश से कपास और सोयाबीन फसल संकट में

महाराष्ट्र: परंडा में कम बारिश से कपास-सोयाबीन संकट मेंपरंडा, महाराष्ट्र: परांडा तालुका में कपास और सोयाबीन के किसान खरीफ के अहम मौसम में कम बारिश के कारण बढ़ती चिंताओं का सामना कर रहे हैं। सीना-कोलेगांव प्रोजेक्ट में पानी की कम उपलब्धता ने मॉनसून की बारिश पर निर्भरता बढ़ा दी है, जिससे फसल के विकास और पैदावार को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है।जिन किसानों ने मौसम की शुरुआत में कपास और सोयाबीन की फसलें बोई थीं, वे अब नमी की कमी के कारण धीमी बढ़त की बात कह रहे हैं। कई इलाकों में सोयाबीन की फसलें पीली पड़ने लगी हैं, जबकि कम बारिश के कारण कपास की फसलों में भी तनाव के लक्षण दिख रहे हैं।अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो किसानों को कपास और सोयाबीन की पैदावार घटने का डर है। कई उत्पादक पहले ही बीज, खाद और कीटनाशकों पर काफी पैसा खर्च कर चुके हैं, और फसल का खराब मौसम आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।सीना-कोलेगांव प्रोजेक्ट में पानी का सीमित भंडार होने से चिंताएं और बढ़ गई हैं, क्योंकि सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता सीमित है। इस इलाके में कपास और सोयाबीन की खेती अब काफी हद तक समय पर होने वाली मॉनसून की बारिश पर निर्भर है।बाजार से जुड़े लोग स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं, क्योंकि कपास और सोयाबीन की पैदावार में किसी भी तरह की कमी से सप्लाई पर असर पड़ सकता है और कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है। फसल के ठीक होने और खरीफ की अंतिम पैदावार के नज़रिए से अगले कुछ हफ्तों की बारिश बहुत अहम होगी।और पढ़ें :- अमेरिकी कपास संकट गहराया, ब्राज़ील ने वैश्विक निर्यात बाजार में बढ़ाई पकड़

अमेरिकी कपास संकट गहराया, ब्राज़ील ने वैश्विक निर्यात बाजार में बढ़ाई पकड़

ब्राजील द्वारा निर्यात ग्राहकों पर कब्जा करने से अमेरिकी कपास संकट और गहरा गया हैअमेरिकी कपास का वित्तीय संकट अब केवल कमजोर कृषि कीमतों तक सीमित नहीं है, क्योंकि ब्राजील उन निर्यात ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है, जो शायद दोबारा वापस न आएं। घेरज़ी अमेरिका के प्रबंध भागीदार बॉब एंटोशक का कहना है कि उत्पादकों को हो रहे अनुमानित नुकसान और घटती मांग से उद्योग की दीर्घकालिक स्थिति खतरे में पड़ रही है।अमेरिकन फार्म ब्यूरो के अनुमान के अनुसार, 2026 में कपास उत्पादन में प्रति एकड़ 342 डॉलर और 2027 में 406 डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो कुल मिलाकर लगभग 3.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। लगातार छह वर्षों तक नकारात्मक रिटर्न मिलने से किसानों की कार्यशील पूंजी पर दबाव बढ़ेगा और परिचालन ऋणों पर निर्भरता बढ़ सकती है।सबसे बड़ा खतरा निर्यात पर निर्भरता है। USDA के अनुमान के अनुसार, अमेरिका 12.3 मिलियन गांठ कपास का निर्यात करेगा, जबकि घरेलू मिलों में इसकी खपत केवल 1.6 मिलियन गांठ रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, ब्राजील उत्पादन बढ़ाने, बेहतर ट्रेसबिलिटी, गुणवत्ता परीक्षण, वित्तपोषण और मिलों के साथ मजबूत संबंधों के कारण लगभग 15 मिलियन गांठ कपास का निर्यात करने की स्थिति में है।पॉलिएस्टर की बढ़ती बाजार हिस्सेदारी और विदेशी कताई मिलों के कम मुनाफे के कारण वैश्विक कपास मांग कमजोर बनी हुई है। एक बार जब मिलें ब्राजील के कपास की गुणवत्ता को स्वीकार कर लेंगी और अपनी उत्पादन प्रक्रियाओं को उसके अनुसार समायोजित कर लेंगी, तो अस्थायी व्यापार समझौते अपने आप अमेरिकी कारोबार को वापस नहीं ला पाएंगे।आपातकालीन भुगतान से किसानों और भूमि क्षेत्र को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन इससे खोए हुए ग्राहक वापस नहीं आएंगे। उद्योग को निर्यात प्रोत्साहन, खरीदारों के लिए वित्तपोषण, गुणवत्ता में निरंतरता, ट्रेसबिलिटी और पश्चिमी गोलार्ध में कपड़ा उत्पादन क्षमता को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।और पढ़ें :-तेलंगाना में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, कपास 46.34 लाख एकड़ तक पहुंची

तेलंगाना में खरीफ बुवाई अंतिम चरण में, कपास 46.34 लाख एकड़ तक पहुंची

तेलंगाना खरीफ़ बुआई अपडेट | 29 जुलाई, 2026कपास: कपास की बुआई 46.34 लाख एकड़ तक पहुँच गई है, जो सामान्य बुआई क्षेत्र का 97.72% है। इस तरह, यह इस सीज़न में तेलंगाना की प्रमुख खरीफ़ फ़सलों में से एक बन गई है।तिलहन: तिलहन की कुल बुआई 37.18 लाख एकड़ में हुई है, जो सामान्य क्षेत्र का 83.07% है। सोयाबीन मुख्य तिलहन फ़सल बनी हुई है; इसकी बुआई 36.65 लाख एकड़ में हुई है, जो इसके सामान्य कवरेज का 87.97% है।मौसम अपडेट: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले कुछ दिनों में तेलंगाना के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं आंधी-तूफ़ान की भविष्यवाणी की है। उम्मीद है कि इस बारिश से खरीफ़ की बाकी बुआई में मदद मिलेगी और मिट्टी में नमी बढ़ेगी। साथ ही, किसानों को सलाह दी गई है कि वे निचले इलाकों वाले खेतों में पानी की निकासी का उचित इंतज़ाम करें ताकि कुछ समय के लिए पानी जमा होने (वॉटरलॉगिंग) की समस्या से बचा जा सके।और पढ़ें :-अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक को दी मंजूरी; भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

अमेरिकी सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक को दी मंजूरी; भारत पर 100% टैरिफ का खतरा

US सीनेट ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाला बिल पास किया, भारत पर 100% टैरिफ लग सकता हैUS सीनेट रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ गई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ सकता है। मंगलवार को सीनेटरों ने 86-12 के वोट से एक बाइपार्टिसन (दोनों पार्टियों के समर्थन वाला) बिल आगे बढ़ाया। यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के एनर्जी ट्रेड और उससे तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई करने के लिए व्यापक अधिकार देगा।प्रस्तावित कानून US राष्ट्रपति को रूसी इंपोर्ट पर 500% टैरिफ और रूसी कच्चे तेल और नेचुरल गैस के दुनिया के पांच सबसे बड़े खरीदारों, साथ ही मॉस्को को एनर्जी प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर अतिरिक्त 100% टैरिफ लगाने की इजाज़त देगा। अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो रूस के सबसे बड़े एनर्जी ग्राहकों में शामिल भारत और चीन पर इसका असर पड़ सकता है।इस उपाय के तहत ईरान प्रतिबंध कानून को 2031 तक बढ़ाया जाएगा और राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया जाएगा कि अगर US के राष्ट्रीय हित में हो तो वे प्रतिबंधों में छूट दे सकें। हालांकि सीनेट इस हफ्ते के आखिर में बिल पास कर सकती है, लेकिन इसके सितंबर से पहले कानून बनने की संभावना कम है क्योंकि हाउस अगस्त में छुट्टी पर है।ट्रंप ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है और वोटिंग से पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की। ज़ेलेंस्की ने US सांसदों से मॉस्को पर प्रतिबंधों का दबाव बनाए रखने का आग्रह किया और इसे "यूरोप और यूक्रेन के लिए एक बड़ा संकेत" बताया। सीनेट में डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने कहा कि यह बिल रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक कड़ा संदेश देगा, हालांकि कुछ सांसदों ने चेतावनी दी कि इससे राष्ट्रपति की टैरिफ लगाने की शक्तियां काफी बढ़ जाएंगी। अगर यह कानून बन जाता है, तो इससे ग्लोबल एनर्जी ट्रेड का स्वरूप बदल सकता है और भारत द्वारा रियायती दरों पर खरीदे जाने वाले रूसी कच्चे तेल के इंपोर्ट पर असर पड़ सकता है।और पढ़ें :- भारत में कपास का स्टॉक बढ़ा, 2025-26 के अंत तक 89.59 लाख गांठ रहने का अनुमान

भारत में कपास का स्टॉक बढ़ा, 2025-26 के अंत तक 89.59 लाख गांठ रहने का अनुमान

मौजूदा कपास स्थिति पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट (30/06/2026 तक की स्थिति) (हर गांठ 170 किलोग्राम की)▪️फसल वर्ष 2025-2026 के दौरान कुल प्रेसिंग का अनुमान 337.80 लाख गांठें लगाया गया है। इसे देखते हुए, सीज़न 25-26 के अंत में (30 सितंबर 2026 को) क्लोजिंग स्टॉक 89.59 लाख गांठें होने का अनुमान है, जो पिछले साल के क्लोजिंग स्टॉक से 34.00 लाख गांठें ज़्यादा है।▪️इस कपास सीज़न में कपास की खपत 348.00 लाख* गांठों तक पहुँच सकती है और 30-06-2026 तक लगभग 261.00 लाख गांठों की खपत की सूचना मिली है। ▪️ जून-2026 के अंत तक कुल निर्यात 15.00 लाख गांठें रहा है, जबकि इस सीज़न वर्ष के लिए अनुमान 18.00 लाख गांठों का था; 30-जून-2026 तक देश से लगभग 11.25 लाख गांठें भेजे जाने का अनुमान है।▪️पता चला है कि मौजूदा फसल वर्ष के अंत तक कुल 60.00 लाख गांठों का आयात हो सकता है। जून-2026 तक अलग-अलग भारतीय बंदरगाहों पर लगभग 51.00 लाख गांठें पहुँच चुकी हैं।▪️ऊपर दी गई बातों को ध्यान में रखते हुए, 30.06.2026 को कुल उपलब्ध स्टॉक 434.97 लाख गांठें होने का अनुमान है, जिसमें ओपनिंग स्टॉक, कुल प्रेसिंग और आयात शामिल हैं। ▪️ 30-जून-2026 को क्लोजिंग स्टॉक 162.72 लाख गांठें होने का अनुमान है, जिसमें से मिलों के पास स्टॉक 94.50 लाख गांठें है, जबकि CCI/MFED, MNCs, गिनर, ट्रेडर्स और एक्सपोर्टर्स के पास यह लगभग 68.22 लाख गांठें है।और पढ़ें :- भारत–माली टेक्सटाइल साझेदारी मजबूत, द्विपक्षीय व्यापार में 55% की बढ़ोतरी

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